भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने अपने अभिनय से अमिट छाप छोड़ी, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिनकी पहचान किसी एक विशेष किरदार से हमेशा के लिए जुड़ गई। अभिनेता इफ्तिखार उन्हीं चुनिंदा नामों में शामिल थे। गंभीर व्यक्तित्व, मजबूत संवाद अदायगी और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के कारण वह फिल्मों में पुलिस अधिकारी की भूमिका के पर्याय बन गए थे। जिस फिल्म में इफ्तिखार पुलिस अफसर बनकर आते, वहां दर्शकों को कानून और ईमानदारी का चेहरा दिखाई देता था। यही वजह थी कि असली पुलिसकर्मी भी उनके अभिनय के मुरीद हो गए थे।
अशोक कुमार ने दिलाया था बड़ा मौका
इफ्तिखार के अभिनय सफर को नई दिशा देने में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्हें पहली बार फिल्म ‘इत्तेफाक’ में इंस्पेक्टर का किरदार निभाने का मौका मिला। इस भूमिका को इफ्तिखार ने जिस गंभीरता और वास्तविकता के साथ पर्दे पर उतारा, उसने फिल्म निर्माताओं को प्रभावित कर दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारी के किरदार के लिए वह फिल्म जगत की पहली पसंद बन गए। धीरे-धीरे उनका नाम भरोसेमंद और प्रभावशाली सहायक अभिनेताओं में गिना जाने लगा।
अमिताभ बच्चन से राजेश खन्ना तक, हर दौर के सितारों संग किया काम
इफ्तिखार ने अपने लंबे फिल्मी करियर में हिंदी सिनेमा के लगभग हर बड़े सितारे के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन की चर्चित फिल्म ‘जंजीर’ में उनकी भूमिका आज भी याद की जाती है। इसके अलावा ‘डॉन’, ‘द ट्रेन’, ‘खामोशी’, ‘राजपूत’, ‘आवाम’ और ‘महबूब की मेहंदी’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। चाहे किरदार छोटा हो या बड़ा, इफ्तिखार अपनी गंभीर अभिनय शैली से हर दृश्य को प्रभावशाली बना देते थे। यही कारण था कि उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों में काम करके हिंदी सिनेमा के इतिहास में विशेष स्थान हासिल किया।
असली पुलिसकर्मी भी करते थे सम्मान
इफ्तिखार का अभिनय केवल अभिनय नहीं लगता था, बल्कि वह सचमुच एक पुलिस अधिकारी की तरह नजर आते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद बोलने का अंदाज और चेहरे का भाव इतना वास्तविक होता था कि दर्शकों को पर्दे और वास्तविकता के बीच का अंतर मिटता हुआ महसूस होता था। कई बार असली पुलिसकर्मी भी उनके अभिनय से इतने प्रभावित हो जाते कि उन्हें सम्मानपूर्वक सलाम करते थे। हिंदी सिनेमा में पुलिस अधिकारी की भूमिका को जिस गरिमा और विश्वसनीयता के साथ उन्होंने प्रस्तुत किया, वह आज भी मिसाल मानी जाती है।
विभाजन की त्रासदी के बीच शुरू हुआ संघर्ष
22 फरवरी 1924 को पंजाब के जालंधर में जन्मे इफ्तिखार ने वर्ष 1944 में फिल्म ‘तकरार’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। देश विभाजन के दौरान उनका परिवार पाकिस्तान चला गया, लेकिन इफ्तिखार ने भारत में ही रहने का फैसला किया। वह अपनी पत्नी और बेटियों के साथ मुंबई में बस गए और यहीं से अपने संघर्षपूर्ण लेकिन सफल फिल्मी सफर को आगे बढ़ाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी और धीरे-धीरे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
बेटी की मौत ने तोड़ दिया अभिनेता का दिल
इफ्तिखार की निजी जिंदगी का अंतिम दौर बेहद दर्दनाक रहा। उनकी बेटी सईदा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। फरवरी 1995 में उनकी बेटी का निधन हो गया, जिसने इफ्तिखार को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया। बताया जाता है कि वह इस सदमे को सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। बेटी की मौत के केवल एक महीने बाद, 4 मार्च 1995 को इफ्तिखार ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐसे कलाकार की विदाई थी जिसने अपने अभिनय से पुलिस अधिकारी के किरदार को अमर बना दिया।
आज भी जिंदा है इफ्तिखार की अभिनय विरासत
इफ्तिखार भले आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा में निभाए गए उनके किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जिंदा हैं। उन्होंने यह साबित किया कि एक सहायक अभिनेता भी अपने अभिनय से मुख्य किरदारों जितनी गहरी छाप छोड़ सकता है। उनकी गंभीर आवाज, अनुशासित व्यक्तित्व और प्रभावशाली अभिनय शैली आज भी फिल्म प्रेमियों के लिए यादगार बनी हुई है।