अल्जाइमर का नाम आते ही बुजुर्ग व्यक्ति का चित्र जेहन में आता है जो चीजें भूलता है नाम याद नहीं रख पाता या एक ही सवाल बार-बार पूछता है। लेकिन विज्ञान अब इसे केवल स्मृति खोने की कहानी नहीं मानता। मस्तिष्क में अल्जाइमर से जुड़े बदलाव स्पष्ट रूप से याददाश्त प्रभावित होने से वर्षों पहले शुरू हो सकते हैं। इस दौरान नींद चाल सूंघने की क्षमता और भाषा में सूक्ष्म परिवर्तन दिख सकते हैं जिन्हें उम्र थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हर बदलाव अल्जाइमर नहीं होता लेकिन चेतावनी के रूप में इन पर ध्यान देना जरूरी है।
नींद के पैटर्न में बदलाव
मस्तिष्क और नींद का गहरा संबंध है। नींद के दौरान मस्तिष्क सूचनाओं को व्यवस्थित करता है और जैविक सफाई प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। शोधों में नींद और अल्जाइमर जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। बार-बार नींद टूटना दिन में ज्यादा नींद आना या पैटर्न में लगातार बदलाव ध्यान देने योग्य हैं। हालांकि हर अनिद्रा अल्जाइमर नहीं होती। उम्र के साथ नींद बदलती है और स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं भी प्रभावित करती हैं। नियमित नींद की गुणवत्ता पर नजर रखना और समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
चाल में धीमापन और संतुलन
बुजुर्गों में चाल धीरे-धीरे बदलना सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा माना जाता है। लेकिन चाल के संतुलन और मानसिक क्षमता में गहरा संबंध होता है। अध्ययनों में पाया गया कि अचानक जरूरत से ज्यादा धीमी चाल संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ी हो सकती है। दिशा बदलने में असहजता या चलते समय दूसरा काम करने में कठिनाई पर ध्यान दें। कारण मांसपेशियों की कमजोरी गठिया पार्किंसन या दृष्टि समस्या भी हो सकते हैं। फिर भी लगातार बदलाव होने पर चिकित्सीय जांच कराना चाहिए। चाल में असामान्य धीमापन नजरअंदाज न करें।
सूंघने की क्षमता में कमी
नाक से आने वाली खुशबू मस्तिष्क के स्मृति और भावनाओं से जुड़े क्षेत्रों से जुड़ी होती है। कुछ न्यूरोडिजनरेटिव बीमारियों में सूंघने की क्षमता कम या खत्म हो जाती है। परिचित खुशबू जैसे फूल मसाले या भोजन पहचानने में लगातार कठिनाई होने पर चिकित्सीय संदर्भ में देखा जा सकता है। सर्दी जुकाम एलर्जी या संक्रमण भी कारण बन सकते हैं इसलिए अकेले इसे अल्जाइमर न मानें। फर्क पर बारीकी से नजर रखना और अन्य लक्षणों के साथ जोड़कर देखना जरूरी है।
शब्द न मिलना और परिचित काम में कठिनाई
कई बार शब्द दिमाग में होता है लेकिन जुबान पर नहीं आता। बातचीत में बार-बार रुकना वस्तु का नाम न बता पाना या असामान्य शब्दों का सहारा लेना भाषा संबंधी हिस्सों में बदलाव का संकेत हो सकता है। परिवार को सिर्फ भूलने पर नहीं बल्कि बात कहने के तरीके में बदलाव पर भी ध्यान देना चाहिए। वर्षों से आसानी से किए जा रहे काम जैसे परिचित रास्ता घरेलू उपकरण या पैसे का हिसाब में कठिनाई पहले सीखी क्षमताओं के कमजोर होने का संकेत है। ये बदलाव अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे आते हैं।
संकेतों को समय रहते पहचानें
अल्जाइमर को उस दिन से न गिनें जब व्यक्ति नाम या चेहरा भूलने लगे। बीमारी की प्रक्रिया उससे बहुत पहले शुरू हो जाती है। शरीर में छोटे मगर लगातार बदलाव पर नजर रखना जरूरी है। नींद चाल सूंघने की क्षमता भाषा और परिचित कार्यों में बदलाव चेतावनी दे सकते हैं। अवसाद दवाओं के दुष्प्रभाव विटामिन की कमी या थायरॉइड समस्या भी मिलते-जुलते लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए निदान के बजाय चेतावनी के रूप में इन संकेतों को लें और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें। डॉक्टर कहते हैं अल्जाइमर पहले कई संकेत देता है जरूरत उन्हें पहचानने की है।