कोलकाता डेस्क: आजकल गलत खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ते वजन के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। इस स्थिति में लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआत में इसके लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते, इसलिए खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर के प्रबंधन में मदद कर सकती है। डाइटिशियन मिस मोनिका दीक्षित ने बताया कि फैटी लिवर की स्थिति में भोजन का चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। डाइट में फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।
फैटी लिवर में क्या खाना चाहिए?
फैटी लिवर की समस्या होने पर डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व दें। हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। मौसमी सब्जियों को भोजन में शामिल करना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसके साथ ही ताजे और पूरे फलों का सेवन किया जा सकता है। डाइट में बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स जैसी चीजें भी सीमित मात्रा में शामिल की जा सकती हैं। खाना बनाते समय तेल की मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए व्यक्तिगत डाइट के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
सब्जियां और फाइबर वाली चीजें
डाइटिशियन मोनिका दीक्षित के मुताबिक, फैटी लिवर में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हरी पत्तेदार और मौसमी सब्जियां इसके लिए अच्छा विकल्प हैं। पालक, लौकी, तोरई और भिंडी जैसी सब्जियों को रोज के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा ओट्स और दलिया जैसे साबुत अनाज भी खाए जा सकते हैं। दालों में भी फाइबर के साथ प्रोटीन पाया जाता है, इसलिए इन्हें संतुलित मात्रा में लेना उपयोगी हो सकता है। फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद कर सकता है। भोजन में अलग-अलग तरह की सब्जियों और साबुत अनाज को शामिल करके डाइट को संतुलित बनाया जा सकता है।
पूरा फल खाएं, जूस से बचें
फैटी लिवर में फलों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन फल खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। सेब, अमरूद, संतरा, पपीता और बेरीज जैसे पूरे फलों का सेवन किया जा सकता है। पूरे फल खाने से शरीर को फाइबर भी मिलता है, जो संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके मुकाबले फलों का जूस पीने से फाइबर की मात्रा कम हो सकती है और एक साथ अधिक मात्रा में शर्करा का सेवन हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से मीठे या पैकेज्ड फलों के पेय लेने के बजाय पूरे फल को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है। फल खाते समय अतिरिक्त चीनी या मीठी चीजें मिलाने से भी बचना चाहिए। हालांकि, फल की मात्रा व्यक्ति की कुल डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जा सकती है।
प्रोटीन पर दें ध्यान
फैटी लिवर की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना भी जरूरी माना जाता है। इसके लिए दाल, चना, राजमा और लोबिया जैसे खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं। अंडा और दही भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। सीमित मात्रा में पनीर और मछली को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। प्रोटीन युक्त भोजन शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। हालांकि, प्रोटीन की मात्रा हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती और यह उम्र, वजन तथा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकती है। इसलिए किसी बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेकर प्रोटीन की मात्रा तय करना बेहतर है।
हेल्दी फैट चुनें
फैटी लिवर में वसा को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है, लेकिन हर तरह की वसा को पूरी तरह बंद करना आवश्यक नहीं होता। बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स जैसे नट्स और सीड्स सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं। इनमें शरीर के लिए उपयोगी पोषक तत्व और वसा पाई जाती है। हालांकि, इनका सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें कैलोरी की मात्रा भी अधिक हो सकती है। खाना बनाते समय इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा तेल में बनी चीजों की जगह कम तेल में तैयार भोजन को प्राथमिकता दी जा सकती है। डाइट में वसा के स्रोत और उनकी मात्रा का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
किन चीजों से बनाएं दूरी?
फैटी लिवर में सिर्फ क्या खाना है, यह जानना ही जरूरी नहीं है, बल्कि किन चीजों को कम करना है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए। ज्यादा चीनी वाली चीजों का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। मिठाई, केक, पेस्ट्री और मीठे पेय जैसी चीजों को सीमित करना बेहतर है। सोडा और ज्यादा चीनी वाले पैकेज्ड जूस से भी दूरी बनाना उपयोगी हो सकता है। समोसा, पकौड़े और फ्रेंच फ्राइज जैसी तली-भुनी चीजों का सेवन भी कम करना चाहिए। मैदा और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को भी डाइट में सीमित रखना चाहिए। इसके साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखने पर ध्यान देना भी जरूरी है।
सिर्फ डाइट नहीं, पूरी लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी
मोनिका दीक्षित के अनुसार, फैटी लिवर में केवल एक-दो खाद्य पदार्थों को डाइट से हटाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पूरे खानपान और जीवनशैली में संतुलन लाने की जरूरत होती है। संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। ज्यादा चीनी, तली-भुनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजों का सेवन कम करना जरूरी है। वहीं सब्जियों, साबुत अनाज, प्रोटीन और पूरे फलों को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है। अगर जांच रिपोर्ट में फैटी लिवर की समस्या सामने आई है, तो अपनी स्थिति के अनुसार डाइट तय करने के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। ખાસकर अगर साथ में कोई दूसरी बीमारी या दवा चल रही हो, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के डाइट में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए।