PM Modi Appeal on Gold: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील के बाद देश के ज्वेलरी कारोबार में चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर छोटे ज्वेलर्स, सोने के कारीगरों, मैन्युफैक्चरर्स और रिटेल कारोबारियों को आशंका है कि अगर ग्राहकों ने खरीदारी टालना शुरू कर दिया तो आने वाले त्योहारी और अक्टूबर-नवंबर के शादी सीजन में कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का अनुमान है कि मांग में लंबे समय तक कमजोरी बनी रही तो भारत की सालाना सोने की खपत करीब 700-800 टन से घटकर 500 टन तक आ सकती है।
आखिर PM मोदी ने सोना खरीदने से क्यों की अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान देशवासियों से करीब एक साल तक सोने के गहने खरीदने से बचने की अपील की थी। उस समय पश्चिम एशिया में जारी संकट और ऊर्जा से जुड़े दबावों के बीच उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत पर जोर दिया था। पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल और गैस का इस्तेमाल भी जरूरत के मुताबिक करने तथा गैर-जरूरी खर्चों को नियंत्रित करने की अपील की थी। सोने की खरीद को लेकर उन्होंने खास तौर पर कहा था कि शादी या किसी अन्य समारोह के बावजूद एक साल तक नए सोने के आभूषण खरीदने से बचने का संकल्प लिया जा सकता है। यही वजह है कि अब दोबारा ऐसी अपील सामने आने के बाद ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के बीच मांग को लेकर चिंता गहराती दिखाई दे रही है।
800 टन से 500 टन तक गिर सकती है सोने की खपत?
CTI के मुताबिक भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का बड़ा उपभोक्ता है और देश में सामान्य परिस्थितियों में सालाना करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। लेकिन व्यापार संगठन का अनुमान है कि अगर ग्राहक लंबे समय तक सोने की खरीदारी से दूरी बनाए रखते हैं, तो यह आंकड़ा करीब 500 टन तक सिमट सकता है। यानी मांग में संभावित गिरावट का असर केवल ज्वेलरी दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े पूरे कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि, यह आंकड़ा CTI का अनुमान है, कोई आधिकारिक सरकारी पूर्वानुमान नहीं। इसलिए इसे संभावित स्थिति के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
शादी सीजन से ठीक पहले क्यों बढ़ी ज्वेलर्स की चिंता?
ज्वेलरी कारोबार के लिए शादी का सीजन सबसे महत्वपूर्ण बिक्री अवधियों में से एक माना जाता है। अक्टूबर-नवंबर में शादियों का सीजन शुरू होने से पहले कई परिवार सोने के गहनों की खरीदारी की तैयारी करते हैं। कारोबारियों को डर है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद कुछ ग्राहक खरीदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। खासकर वे लोग जो यह मान रहे हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है, वे अभी खरीदारी करने के बजाय इंतजार करना पसंद कर सकते हैं। यही वजह है कि कारोबारियों की चिंता केवल वर्तमान बिक्री को लेकर नहीं, बल्कि आगामी फेस्टिव और वेडिंग सीजन की संभावित मांग को लेकर भी है।
छोटे ज्वेलर्स पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है असर
ज्वेलरी कारोबार में बड़े संगठित ब्रांड के साथ बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और पारंपरिक कारीगर भी जुड़े हैं। CTI का कहना है कि मांग में कमी आने पर इन छोटे कारोबारियों पर अपेक्षाकृत ज्यादा दबाव पड़ सकता है। बड़े ब्रांड्स के पास मजबूत वित्तीय संसाधन, व्यापक नेटवर्क और अलग-अलग कारोबार रणनीतियां होती हैं। इसके उलट छोटे ज्वेलर्स का कारोबार स्थानीय ग्राहकों की आवाजाही और नियमित ऑर्डर पर अधिक निर्भर करता है। अगर ग्राहक अंगूठी, झुमके या दूसरे छोटे आभूषणों की खरीदारी भी टालने लगें, तो इसका सीधा असर इन दुकानदारों की दैनिक बिक्री पर पड़ सकता है।
7-10 दिन से ग्राहक नहीं आने का दावा
कारोबारियों की ओर से बाजार में कमजोर फुटफॉल को लेकर भी चिंता जताई गई है। कुछ रिटेल ज्वेलर्स का दावा है कि पिछले 7 से 10 दिनों में उनके यहां ग्राहकों की संख्या बेहद कम रही है और कुछ दुकानदारों ने तो एक भी ग्राहक नहीं आने की बात कही है। कारोबारियों के मुताबिक, ग्राहकों के बीच यह धारणा भी बन रही है कि आने वाले समय में सोने की कीमत नीचे जा सकती है। इसी उम्मीद में लोग फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं। कम बिक्री के कारण कुछ रिटेलर्स द्वारा नए स्टॉक और नए ऑर्डर को लेकर भी सावधानी बरतने की बात सामने आई है।
सोने के कारीगरों के रोजगार पर भी मंडरा रहा खतरा?
ज्वेलरी कारोबार में बिक्री कम होने का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगर, छोटे मैन्युफैक्चरर्स और वर्कशॉप में काम करने वाले कर्मचारी भी ऑर्डर की संख्या पर निर्भर रहते हैं। CTI से जुड़े कारोबारियों ने चिंता जताई है कि अगर मांग लंबे समय तक कमजोर रही तो छोटे कारोबारियों के लिए कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है। व्यापारियों का दावा है कि पहली अपील के बाद कुछ छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के कारोबार में 60-70 फीसदी तक गिरावट आई थी। यह आंकड़ा भी व्यापार संगठन और कारोबारियों का दावा है, कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा नहीं।
बड़े ब्रांड्स के मुकाबले छोटे कारोबारियों की स्थिति अलग
कारोबारियों का तर्क है कि सोने की खरीद में गिरावट का असर पूरी इंडस्ट्री पर पड़ सकता है, लेकिन इसका दबाव सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं होगा। छोटे ज्वेलर्स और पारंपरिक कारीगर सीधे ग्राहक की खरीदारी और स्थानीय मांग पर निर्भर रहते हैं। वहीं बड़े संगठित ब्रांड्स के पास अधिक वित्तीय क्षमता और व्यापक कारोबार नेटवर्क होता है। इसी वजह से CTI का कहना है कि मौजूदा स्थिति में छोटे रिटेलर्स, गोल्डsmiths और मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
क्या ज्वेलरी कंपनियों के शेयर भी प्रभावित होंगे?
प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी सेक्टर से जुड़ी कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी बाजार की नजर रही। ताजा रिपोर्टों में Titan, Kalyan Jewellers और PC Jeweller जैसी कंपनियों के शेयरों में दबाव का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी कंपनी के शेयर में उतार-चढ़ाव केवल एक खबर की वजह से नहीं होता। सोने की कीमत, मांग, मार्जिन, कंपनी के नतीजे, बाजार का रुख और निवेशकों की धारणा समेत कई कारक शेयर की चाल को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी एक कारण को शेयर प्रदर्शन का निश्चित कारण मानना उचित नहीं होगा।