ईरान में सर्वोच्च नेता के तौर पर 36 वर्ष तक कार्यरत रहे अली ख़ामेनेई का निधन ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में युद्ध, मिसाइल हमले और सैन्य अभियानों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। तेहरान में तीन दिन का सार्वजनिक शोक और विदाई समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसके बाद उन्हें उत्तर–पूर्वी पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
आज रात शुरू होगी अंतिम रस्में
तेहरान स्थित इमाम खोमैनी मस्जिद में अंतिम संस्कार से पहले की परंपरागत रस्में ईरानी समयानुसार आज रात 10 बजे शुरू होंगी। यहां तीन दिन तक श्रद्धांजलि समारोह चलेगा, जिसमें देशभर से लोग शामिल होंगे। अंतिम संस्कार की अंतिम तिथि और समय का आधिकारिक ऐलान अलग से किया जाएगा।
युद्ध की आग में घिरा विदाई का माहौल
अली ख़ामेनेई के निधन की प्रारंभिक सूचना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया संदेश में दी थी, जिसके बाद ईरानी प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि की। इस घोषणा के साथ ही पूरा क्षेत्र और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। इस समय ईरान खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल व ड्रोन ऑपरेशन चला रहा है, जबकि अमेरिका और इज़रायल ईरान के सामरिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संघर्ष में अब तक हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मशहद क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मशहद ईरान का धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र शहर है। यहां इमाम रज़ा दरगाह स्थित है, जिसे शिया मुसलमानों का सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है। इसी शहर में अली ख़ामेनेई को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाना उनकी धार्मिक विरासत और देश में उनके लंबे प्रभाव को दर्शाता है।
तेहरान में उमड़ी भीड़, क्षेत्र में बढ़ा सैन्य तनाव
तेहरान में विदाई समारोह के दौरान हजारों लोग जुट रहे हैं। वहीं, युद्ध की पृष्ठभूमि में ईरानी सेना, हवाई रक्षा प्रणाली और क्रांतिकारी गार्ड के दस्तों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अली ख़ामेनेई का निधन इस पूरे भू-राजनीतिक संघर्ष में एक नए अध्याय का आरंभ कर सकता है।
36 वर्षों तक ईरान का चेहरा रहे अली ख़ामेनेई
अली ख़ामेनेई 1989 में आयतुल्लाह खोमैनी के बाद सर्वोच्च नेता बने। उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की राजनीति, सैन्य मामलों, धार्मिक संरचना और विदेश नीति को दिशा दी। उनके निधन के बाद देश में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई है।
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