कीव/नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री अंद्री सीबीहा से उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस दौरान भारत ने साढ़े तीन साल से चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और शांति बहाल करने में हर संभव सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी बातचीत के जरिए समाधान की संभावना जताई है।
"यह युद्ध का युग नहीं": कीव में शांति का संदेश
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है और युद्ध के मैदान से कभी भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति पुतिन को दिए गए शांति संदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के हर दिन के साथ जान-माल का नुकसान हो रहा है, इसलिए दोनों पक्षों को बातचीत से रास्ता निकालना होगा।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जताया भारत का आभार
मुलाकात के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने शांति प्रक्रिया में सहयोग की पेशकश के लिए भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का रुख बेहद स्पष्ट और रचनात्मक है। जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि दुनिया के अन्य प्रमुख देश भी भारत की तरह शांति स्थापित करने के लिए आगे आएंगे।
आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
कूटनीतिक बातचीत के अलावा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भी सहमति बनी। भारत और यूक्रेन ने फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, खाद्य उत्पाद, उर्वरक, भारी मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने का फैसला किया। युद्ध की परिस्थितियों के बावजूद यह बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक संबंधों को दर्शाती है।