भारत में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत और मुलाकात के लिए तैयार हैं। एक साक्षात्कार में जेलेंस्की ने संभावित मुलाकात के लिए अमेरिका के मियामी में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध को समाप्त करने के लिए विभिन्न देशों की ओर से कूटनीतिक प्रयास फिर सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं।
मोदी-पुतिन मुलाकात में बातचीत पर जोर
इस घटनाक्रम को भारत की कूटनीतिक पहल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया था। भारत लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है। प्रधानमंत्री की यह स्थिति इस बात को रेखांकित करती है कि युद्ध का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जा सकता है।
अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिशें भी तेज
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की ओर से भी हाल में कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। युद्ध अब 5वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने दोनों देशों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के मॉस्को और कीव दौरे को इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों पक्षों से संपर्क साधने की इस कोशिश को युद्धविराम और भविष्य की बातचीत के लिए संभावित आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप-पुतिन बातचीत से भी बनी उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हाल में युद्ध को लेकर फोन पर बातचीत भी हुई है। क्रेमलिन की ओर से इस वार्ता को स्पष्ट और रचनात्मक बताया गया। हालांकि ऐसी बातचीत का वास्तविक परिणाम तभी सामने आएगा, जब रूस और यूक्रेन के बीच सीधे संवाद की ठोस प्रक्रिया आगे बढ़े। जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रतिनिधियों के मॉस्को और कीव दोनों जाने को सकारात्मक संकेत बताया है। उनका मानना है कि किसी भी गंभीर कूटनीतिक पहल के लिए दोनों पक्षों से एक साथ बातचीत करना आवश्यक है।
मियामी में जी20 मंच बन सकता है अहम
इस वर्ष अमेरिका के पास जी20 की अध्यक्षता है और इसी क्रम में मियामी में प्रस्तावित जी20 शिखर सम्मेलन रूस-यूक्रेन संवाद के लिए संभावित मंच बन सकता है। जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि वह ऐसे अवसर पर पुतिन से मिलने के लिए तैयार हैं। यदि दोनों नेताओं के बीच प्रत्यक्ष मुलाकात की परिस्थितियां बनती हैं तो यह युद्ध के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम हो सकता है। हालांकि मुलाकात के लिए दोनों पक्षों की सहमति, एजेंडा और संभावित परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
रूस की जी20 गतिविधियां भी बढ़ीं
जी20 से जुड़े मंचों पर रूस की भागीदारी भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण है। सितंबर की शुरुआत में रूस के वित्त मंत्री एंतोन सिलुआनोव की उत्तरी कैरोलिना में हुई जी20 बैठक में मौजूदगी ने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता पैदा की थी। इसके अलावा एक रूसी राजनयिक ने संकेत दिया है कि मॉस्को अगले सप्ताह ह्यूस्टन में होने वाली जी20 ऊर्जा बैठक में अधिकारियों को भेजेगा। इससे स्पष्ट है कि रूस वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा मंचों पर अपनी भागीदारी बनाए हुए है, जबकि युद्ध के बीच कूटनीतिक संपर्क के रास्ते भी खुले हुए हैं।
भारत की पहल को मिली नई कूटनीतिक जमीन
जेलेंस्की का पुतिन से बातचीत के लिए तैयार होने का संकेत भारत के लिए भी कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत ने लगातार यह रुख रखा है कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति का रास्ता बातचीत से निकलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न नेताओं के साथ बातचीत में भी संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने का संदेश सामने आता रहा है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि जेलेंस्की का ताजा बयान सीधे तौर पर भारत की पहल का परिणाम है, लेकिन ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सामने आया यह घटनाक्रम भारत के उस कूटनीतिक दृष्टिकोण को जरूर बल देता है, जिसमें युद्धरत पक्षों के बीच संवाद को समाधान की पहली सीढ़ी माना गया है।