स्वीडन. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हालिया स्वीडन दौरा भारत की विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारत और स्वीडन ने अपने संबंधों को नई दिशा देते हुए उन्हें रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण समझ बने। इस दौरे को यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक प्रभाव के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
उल्फ क्रिस्टरसन के साथ हुई व्यापक वार्ता
स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा उत्पादन, डिजिटल विकास और उभरती तकनीकों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने यह भी स्वीकार किया कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में लोकतांत्रिक और नवाचार आधारित साझेदारी को और अधिक गहरा करना समय की आवश्यकता है। इस बैठक को भारत-स्वीडन संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
‘संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0’ बना प्रमुख आकर्षण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि स्वीडन यात्रा के दौरान कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई गति देंगे। उन्होंने बताया कि ‘संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0’ की शुरुआत और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता गलियारे की स्थापना इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तकनीकी निवेश, स्टार्टअप सहयोग और औद्योगिक विकास को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी को मिला स्वीडन का प्रतिष्ठित सम्मान
स्वीडन यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान से भी अलंकृत किया गया। यह सम्मान भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए दिया गया। इस सम्मान को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हाल के वर्षों में भारत ने यूरोपीय देशों के साथ अपने रिश्तों को जिस तेजी से विस्तार दिया है, यह सम्मान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
नॉर्वे दौरा बना ऐतिहासिक कूटनीतिक कदम
स्वीडन यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी अब नॉर्वे पहुंच चुके हैं। विशेष बात यह है कि पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा मानी जा रही है। साथ ही यह प्रधानमंत्री मोदी का भी नॉर्वे का पहला आधिकारिक दौरा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्कटिक क्षेत्र का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, भारत का नॉर्वे के साथ संबंध मजबूत करना रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान समुद्री सहयोग, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
यूरोप में भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का संदेश
स्वीडन में ‘उद्योग के लिए यूरोपीय राउंड टेबल’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। उन्होंने विदेशी निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत तेजी से आर्थिक सुधारों, तकनीकी विकास और वैश्विक साझेदारियों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए यूरोपीय उद्योग जगत को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण भी दिया। विशेषज्ञों के अनुसार नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ते संबंध भारत की वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकते हैं।