वाशिंगटन:अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता (Iran-USA Peace Deal) अभी भी अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में 'नो रेड लाइन, नो डील' की नीति अपनाते हुए शर्तों पर किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे तक चली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद भी इस डील को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका और बैठक पूरी तरह 'बेअसर' रही।
ट्रंप की 'रेड लाइन' और सोशल मीडिया पर खुली शर्तें
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया, "राष्ट्रपति ट्रंप केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अमेरिकी हितों की रक्षा करेगा और उनके द्वारा तय की गई सख्त सीमाओं को पूरा करेगा।" अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियारों से लैस नहीं होने देगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर इस संभावित समझौते की मुख्य शर्तें साझा की हैं। ट्रंप की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
ईरान को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को स्थायी रूप से बंद करना होगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतर्राष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोलना होगा और वहां बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Sea-Mines) को हटाना होगा।
ईरान को अपने उच्च संवर्धित (Highly Enriched) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपना होगा ताकि उसे नष्ट किया जा सके।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत फिलहाल ईरान को कोई वित्तीय लाभ या आर्थिक लेन-देन नहीं दिया जाएगा।
ईरान ने भी खींची अपनी 'रेड लाइन', संप्रभुता से समझौते से इनकार
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका की इन शर्तों के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने कहा कि अभी दोनों देशों के बीच केवल संदेशों का आदान-प्रदान चल रहा है, कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने संकेत दिया कि हॉर्मुज जलमार्ग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चल रही है, लेकिन कोई भी फैसला ईरान के संप्रभु अधिकारों (Sovereign Rights) के आधार पर ही होगा। वहीं, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान कभी भी यूरेनियम संवर्धन का अधिकार नहीं छोड़ेगा और न ही हॉर्मुज जलमार्ग पर अपना नियंत्रण खोने देगा।
2018 का इतिहास और अनिश्चित भविष्य
गौरतलब है कि साल 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ही ओबामा प्रशासन के समय ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका को बाहर कर लिया था। उस वक्त ट्रंप ने उस समझौते को 'एकतरफा और भयानक' बताया था। वर्तमान में ट्रंप प्रशासन एक तरफ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य दबाव भी बनाए हुए है। दोनों देशों के अड़ियल रुख के कारण इस ऐतिहासिक समझौते का भविष्य फिलहाल अधर में लटका हुआ है।