दूध में मौजूद अंतर का संबंध उसके रंग या स्वाद से नहीं, बल्कि उसमें पाए जाने वाले एक विशेष प्रोटीन से होता है। दूध में बीटा-केसीन नामक प्रोटीन पाया जाता है, जिसके अलग-अलग प्रकार होते हैं। A1 दूध में A1 बीटा-केसीन प्रोटीन मौजूद होता है, जबकि A2 दूध में A2 बीटा-केसीन पाया जाता है। यह अंतर मुख्य रूप से गायों की नस्ल के कारण होता है। विदेशी नस्ल की गायें जैसे होल्सटीन और जर्सी सामान्यतः A1 दूध देती हैं, जबकि भारतीय देसी नस्लें जैसे गिर, साहीवाल और रेड सिंधी अधिकतर A2 दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं।
शरीर पर दोनों दूध का असर क्यों माना जाता है अलग
विशेषज्ञों के अनुसार A1 और A2 दूध देखने में लगभग समान होते हैं, लेकिन शरीर में इनके पाचन की प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों को A1 दूध पीने के बाद पेट फूलना, गैस, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि A1 प्रोटीन टूटने पर BCM-7 नामक एक यौगिक बनता है, जो कुछ व्यक्तियों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। वहीं A2 दूध को अपेक्षाकृत हल्का और कुछ लोगों के लिए आसानी से पचने वाला माना जाता है। हालांकि इस विषय पर अभी भी व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।
स्वाद और बनावट में भी महसूस हो सकता है फर्क
A2 दूध पीने वाले कई लोग बताते हैं कि इसकी बनावट सामान्य दूध की तुलना में थोड़ी अधिक क्रीमी और गाढ़ी महसूस हो सकती है। हालांकि स्वाद में बहुत बड़ा अंतर आमतौर पर नहीं होता। दूध की गुणवत्ता, पशु आहार और प्रसंस्करण पद्धति भी स्वाद और बनावट को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है। कई लोग केवल स्वाद के आधार पर दोनों में अंतर पहचान भी नहीं पाते।
A2 दूध आखिर इतना महंगा क्यों मिलता है?
बाजार में A2 दूध की कीमत सामान्य दूध की तुलना में काफी अधिक होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह देसी नस्ल की गायों की सीमित संख्या और उनका पारंपरिक पालन-पोषण तरीका माना जाता है। A2 दूध उत्पादक कंपनियां अक्सर इसे अधिक प्राकृतिक, शुद्ध और पारंपरिक प्रक्रिया से तैयार किया गया दूध बताकर बेचती हैं। इसके अलावा देसी गायों के रखरखाव की लागत और सीमित उत्पादन भी कीमत बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि A2 दूध आज एक प्रीमियम हेल्थ प्रोडक्ट के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
पोषण के मामले में कितना बड़ा है अंतर?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार A1 और A2 दोनों प्रकार के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B12, पोटैशियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। यानी न्यूट्रिशन के स्तर पर दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं माना जाता। मुख्य अंतर केवल प्रोटीन के प्रकार और कुछ लोगों में पाचन क्षमता को लेकर देखा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को सामान्य दूध पीने के बाद पेट संबंधी समस्या महसूस होती है, तो वह A2 दूध आजमा सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि A1 दूध हर किसी के लिए नुकसानदायक है।
क्या A2 दूध को लेकर किए जा रहे दावे पूरी तरह सही हैं?
A2 दूध को लेकर बाजार में कई बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय अब भी इस विषय पर शोध कर रहा है। कुछ अध्ययन A2 दूध को पाचन के लिहाज से बेहतर बताते हैं, लेकिन अभी तक यह पूरी तरह सिद्ध नहीं हुआ है कि A1 दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूध चुनते समय केवल ट्रेंड या विज्ञापन पर निर्भर रहने के बजाय उसकी शुद्धता, ताजगी और शरीर पर उसके प्रभाव को प्राथमिकता देनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो दूध आपकी बॉडी को सूट करे और पोषण दे, वही आपके लिए बेहतर विकल्प माना जाएगा।