गर्मी हो, ज्यादा पसीना आए या दिनभर थककर शरीर टूटने लगे तो सबसे पहले पानी का गिलास हाथ में ले लिया जाता है। पानी पीना बेहद जरूरी है लेकिन हर स्थिति में सिर्फ पानी से शरीर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी नहीं हो पाती। जब पसीने, उल्टी या दस्त के जरिए शरीर से पानी के साथ जरूरी खनिज भी बाहर निकल जाते हैं तब केवल पानी पर्याप्त नहीं रहता। शरीर में पानी के साथ कुछ खास खनिज लगातार काम करते हैं जिन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स कहा जाता है। ये पानी का संतुलन बनाए रखने के अलावा नसों तक संदेश पहुंचाने, मांसपेशियों को सही तरीके से सिकुड़ने और दिल की सामान्य धड़कन बनाए रखने में मदद करते हैं। सही हाइड्रेशन के लिए पानी और इन खनिजों दोनों का संतुलन जरूरी है।
शरीर के 5 मुख्य इलेक्ट्रोलाइट्स और उनके काम
इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे खनिज हैं जो शरीर के तरल पदार्थों में घुलकर विद्युत आवेश पैदा करते हैं। इनमें मुख्य रूप से सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड शामिल हैं। सोडियम शरीर में पानी के संतुलन और रक्त की मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है। पोटैशियम नसों और मांसपेशियों के कामकाज के साथ दिल की सामान्य धड़कन के लिए बेहद जरूरी है। कैल्शियम मांसपेशियों के संकुचन में सहायक होता है जबकि मैग्नीशियम शरीर में ऊर्जा बनाने समेत कई रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल रहता है। क्लोराइड भी तरल संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाता है। ये पांचों खनिज अलग-अलग काम करते हुए भी एक-दूसरे के साथ मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं।
कब होती है इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी
हर व्यक्ति को रोज इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक पीने की जरूरत नहीं होती। सामान्य दिनों में संतुलित खान-पान और पर्याप्त तरल पदार्थ से शरीर को जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स मिल जाते हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में इनकी कमी का खतरा बढ़ जाता है। बहुत ज्यादा पसीना आना, लंबे समय तक तेज व्यायाम करना, उल्टी-दस्त होना, तेज बुखार, पर्याप्त खाना-पीना न होना या कुछ दवाओं का सेवन ऐसी स्थितियां हैं जब शरीर से पानी के साथ सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। इन परिस्थितियों में सिर्फ पानी पीने से कमी पूरी नहीं होती बल्कि सही अनुपात में खनिजों की पूर्ति करनी पड़ती है। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो थकान और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कमी के लक्षण और कब करें सतर्कता
इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ने पर हर किसी में एक जैसे लक्षण नहीं दिखते। कमजोरी, थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा इलेक्ट्रोलाइट की कमी होना नहीं है। नींद की कमी, कम भोजन, लो ब्लड प्रेशर या संक्रमण में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर उल्टी-दस्त के साथ बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, पेशाब कम होना, भ्रम या बेहोशी जैसी समस्या हो रही हो तो इसे सामान्य थकान समझकर घर पर इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
कब पिएं इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक या ओआरएस
यह एक आम गलतफहमी है कि पानी से ज्यादा फायदा हमेशा इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक से ही होता है। अगर सामान्य दिन में पर्याप्त खाना खा रहे हैं, सामान्य मात्रा में पानी पी रहे हैं और बहुत ज्यादा पसीना नहीं निकल रहा तो अलग से इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की जरूरत आमतौर पर नहीं होती। वहीं दस्त या उल्टी के कारण शरीर में पानी और लवण की कमी हो रही हो तो सही मात्रा में तैयार किया गया ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन यानी ओआरएस ज्यादा उपयोगी साबित होता है। किडनी या दिल की बीमारी वाले लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट या ज्यादा मात्रा में ड्रिंक लेने से बचना चाहिए। बार-बार समस्या होने पर खुद से पाउडर या ड्रिंक लेने के बजाय कारण पता करना ज्यादा जरूरी है।