भारत में सौंदर्य प्रसाधनों का बाजार जिस तेजी से बदल रहा है, उसके पीछे युवा उपभोक्ताओं की बदलती पसंद एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। खासकर 16 से 30 वर्ष की उम्र के उपभोक्ता अब केवल किसी पुराने और भरोसेमंद उत्पाद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि लगातार नए प्रयोग करने के लिए तैयार दिखाई देते हैं। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल मंचों के जरिए उन्हें दुनिया भर में चल रहे सौंदर्य रुझानों, नए उत्पादों, सामग्री और मेकअप तकनीकों की जानकारी तुरंत मिल जाती है। कोरियाई सौंदर्य देखभाल, चमकदार त्वचा और कम से कम मेकअप जैसे रुझान अब भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने में वर्षों नहीं लगाते। इसी वजह से कंपनियों के सामने चुनौती केवल नया उत्पाद बाजार में उतारने की नहीं, बल्कि यह समझने की भी है कि वैश्विक रुझानों को भारतीय त्वचा, मौसम और उपभोक्ता की आर्थिक क्षमता के अनुरूप कैसे ढाला जाए।
नई पीढ़ी प्रयोग करने से नहीं डरती
इंसाइट कॉस्मेटिक्स के बिक्री और विपणन निदेशक मिहिर जैन के मुताबिक आज का Gen Z उपभोक्ता पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक प्रयोगधर्मी है। यदि किसी उत्पाद में त्वचा की देखभाल से जुड़ी विशेषता जुड़ रही है या कोई नया वैश्विक सौंदर्य रुझान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, तो युवा उसे आजमाने के लिए तैयार हैं। इसके विपरीत 30 वर्ष से अधिक उम्र के उपभोक्ताओं में उन उत्पादों के प्रति अधिक स्थिरता दिखाई देती है, जिन पर वे लंबे समय से भरोसा करते आए हैं। जैन ने उदाहरण देते हुए बताया कि पुरानी पीढ़ियों में किसी एक उत्पाद के प्रति लंबे समय तक जुड़ाव आम था। उन्होंने अपनी मां का उदाहरण देते हुए बताया कि वह लगभग 15 वर्षों तक एक ही काजल का इस्तेमाल करती रही थीं। आज सोशल मीडिया ने उपभोक्ता की दुनिया को इतना व्यापक बना दिया है कि नई पीढ़ी वैश्विक सौंदर्य बाजार में होने वाले बदलावों से लगभग तुरंत जुड़ जाती है।
अब मेकअप में भी त्वचा की देखभाल का जोर
सौंदर्य उद्योग में इस समय सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक मेकअप और त्वचा की देखभाल के बीच बढ़ती नजदीकी है। उपभोक्ता अब ऐसा मेकअप चाहता है जो केवल चेहरे का रूप न बदले, बल्कि त्वचा को अतिरिक्त लाभ भी दे। इसी सोच को ‘स्किनिफिकेशन’ कहा जा रहा है, जिसमें रंगीन सौंदर्य प्रसाधनों के साथ त्वचा के अनुकूल सामग्री को शामिल किया जाता है। मिहिर जैन के अनुसार, इंसाइट कॉस्मेटिक्स भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और मेकअप उत्पादों में विटामिन E तथा जोजोबा ऑयल जैसी त्वचा-अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल कर रहा है। चमकदार होंठों वाले उत्पाद और त्वचा की देखभाल से जुड़े मेकअप विकल्प इस बदलाव के उदाहरण हैं। इसका मूल विचार यह है कि उपभोक्ता कम उत्पादों से अधिक काम लेना चाहता है और उसका मेकअप उसकी त्वचा की जरूरतों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करे।
पुराने भरोसेमंद उत्पादों को भी नहीं छोड़ रही कंपनी
बदलते रुझानों के बीच कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि नए प्रयोग करते हुए पुराने सफल उत्पादों का भरोसा कैसे बनाए रखा जाए। जैन के मुताबिक इंसाइट कॉस्मेटिक्स इसी संतुलन पर काम कर रही है। कंपनी के कुछ उत्पाद लंबे समय से बाजार में मौजूद हैं और उपभोक्ताओं के बीच उनकी मजबूत स्वीकार्यता बनी हुई है। इसका उदाहरण लगभग 10 वर्षों से बाजार में मौजूद कंसीलर पैलेट है, जो चेहरे के दाग-धब्बों को छिपाने और त्वचा का रंग एकसार दिखाने जैसी कई जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे उत्पादों को उपभोक्ता केवल इसलिए बदलना नहीं चाहता क्योंकि उसने लंबे समय में उनके परिणामों पर भरोसा विकसित किया है। इसलिए कंपनी एक तरफ अपने स्थापित उत्पादों को बनाए रख रही है, वहीं दूसरी ओर युवा उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के अनुरूप नए विकल्प भी पेश कर रही है।
कोरियाई सौंदर्य से प्रेरणा, लेकिन पूरी रणनीति उसी पर आधारित नहीं
कोरियाई सौंदर्य देखभाल ने भारत में पिछले कुछ समय में खासा प्रभाव डाला है, लेकिन मिहिर जैन का कहना है कि इंसाइट कॉस्मेटिक्स को पूरी तरह कोरियाई सौंदर्य शैली की कंपनी कहना सही नहीं होगा। कंपनी ने कोरियाई रुझान से प्रेरित कुछ उत्पाद जरूर पेश किए हैं, जिनमें चमकदार और एकसार त्वचा की चाहत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया मॉइस्चराइजर भी शामिल है। हालांकि, कंपनी की पूरी उत्पाद श्रृंखला भारतीय उपभोक्ता की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। यही वजह है कि वैश्विक रुझानों को अपनाने के साथ भारतीय सामग्री और पारंपरिक जरूरतों को भी जगह दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर कंपनी के क्लींजिंग बाम में केसर जैसी भारतीय सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यानी रणनीति केवल विदेशी रुझानों की नकल करने की नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय उपभोक्ता के लिए प्रासंगिक बनाने की है।
‘ग्लास स्किन’ की लोकप्रियता के पीछे बदलती उपभोक्ता सोच
चमकदार और स्वस्थ दिखने वाली त्वचा का रुझान भारत में नया नहीं है, लेकिन हाल के समय में इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। जैन के मुताबिक पहले कोरियाई शैली की चमकदार त्वचा से जुड़े उत्पाद बाजार में मौजूद होने के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता सीमित थी। पिछले वर्ष से इस तरह के रुझानों को लेकर लोगों की रुचि और स्वीकार्यता में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। इसका एक कारण सोशल मीडिया पर लगातार दिखाई देने वाली ऐसी सामग्री भी है, जिसने उपभोक्ताओं को नए सौंदर्य मानकों और तकनीकों से परिचित कराया है। हालांकि, केवल किसी लोकप्रिय रुझान को देखकर उत्पाद तुरंत बाजार में उतार देना संभव नहीं होता। किसी सौंदर्य उत्पाद को तैयार करने, उसकी गुणवत्ता जांचने और बाजार तक पहुंचाने में लंबा समय लगता है।
एक उत्पाद बाजार तक पहुंचने में लग सकते हैं 12 से 18 महीने
सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में तेजी से बदलते रुझानों के बावजूद किसी नए उत्पाद को विकसित करने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। मिहिर जैन के अनुसार, एक उत्पाद को बाजार में उतारने में लगभग 12 से 18 महीने तक का समय लग सकता है। इस दौरान उसके निर्माण से लेकर विभिन्न प्रकार की जांच, नैदानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और अन्य आकलन किए जाते हैं। यही वजह है कि आज कोई रुझान तेजी से लोकप्रिय होता दिखाई दे, तो जरूरी नहीं कि कंपनी तुरंत उसी पर आधारित उत्पाद बाजार में पेश कर सके। कंपनियों को यह भी देखना होता है कि नया उत्पाद भारतीय मौसम, त्वचा और उपभोक्ता की अपेक्षाओं के अनुरूप कितना प्रभावी होगा। इस प्रक्रिया में समय लगने के बावजूद यही शोध और परीक्षण किसी उत्पाद को केवल लोकप्रिय रुझान का हिस्सा बनने के बजाय भरोसेमंद विकल्प बनाने में मदद करते हैं।
सौंदर्य बाजार अब ‘कम लेकिन बेहतर’ की ओर बढ़ रहा है
Gen Z की बदलती पसंद से एक और बड़ा संकेत सामने आ रहा है। युवा उपभोक्ता बड़ी संख्या में उत्पाद खरीदने के बजाय ऐसे उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहा है जो एक साथ कई जरूरतें पूरी कर सकें। मेकअप के साथ त्वचा की देखभाल का लाभ देने वाले उत्पाद इसी सोच का हिस्सा हैं। ‘कम ज्यादा है’ की अवधारणा अब केवल जीवनशैली तक सीमित नहीं रही, बल्कि सौंदर्य प्रसाधनों में भी दिखाई दे रही है। इससे कंपनियों पर ऐसे उत्पाद विकसित करने का दबाव बढ़ रहा है जो उपयोग में सरल हों, कई जरूरतें पूरी करें और कीमत के लिहाज से भी पहुंच के भीतर रहें। भारत जैसे विविध बाजार में यह संतुलन आसान नहीं है, क्योंकि उपभोक्ताओं की त्वचा, मौसम और पसंद में काफी अंतर है। फिर भी यही चुनौती आने वाले वर्षों में सौंदर्य उद्योग में सबसे बड़े नवाचारों को जन्म दे सकती है।
भारतीय जरूरत और वैश्विक रुझान के बीच बनेगा नया सौंदर्य बाजार
भारत का सौंदर्य बाजार अब केवल विदेशी रुझानों को अपनाने वाला बाजार नहीं रह गया है। युवा उपभोक्ता दुनिया भर से विचार और प्रेरणा ले रहा है, लेकिन अंततः वह ऐसा उत्पाद चाहता है जो उसकी अपनी त्वचा, मौसम और जरूरत के अनुकूल हो। इसी कारण कंपनियों के लिए वैश्विक रुझान और भारतीय जरूरत के बीच संतुलन बनाना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। मिहिर जैन की बातों से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में त्वचा की देखभाल और मेकअप के बीच की दूरी और कम होगी। उत्पादों में नए सक्रिय घटक, बहुउपयोगिता और बेहतर त्वचा-अनुकूलता पर जोर बढ़ सकता है। साथ ही, उपभोक्ता जितना अधिक जागरूक होगा, कंपनियों से पारदर्शिता, प्रमाणन और उत्पाद संबंधी दावों की स्पष्टता की अपेक्षा भी उतनी ही बढ़ेगी। यही बदलाव भारत के सौंदर्य बाजार को अगले चरण में ले जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बन सकता है।