आजकल ज्यादातर काम डेस्क पर बैठकर होता है इसलिए दिन में कई घंटे लगातार बैठे रहना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। लंबे समय तक शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना सिर्फ कमर दर्द या वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं। इसका असर किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है। हालांकि सिर्फ बैठे रहने से सीधे किडनी खराब नहीं होती लेकिन लंबे समय तक बैठने वाली जीवनशैली कई समस्याओं को बढ़ावा देती है जो आगे किडनी बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं। शारीरिक निष्क्रियता मेटाबॉलिक हेल्थ को प्रभावित करती है।
वजन डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का खतरा
लंबे समय तक फिजिकली एक्टिव न रहने से वजन बढ़ सकता है। शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता और मेटाबॉलिक हेल्थ खराब हो सकती है। ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा भी रहता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों क्रॉनिक किडनी डिजीज के बड़े जोखिम कारक हैं। समय के साथ ये स्थितियां किडनी की छोटी ब्लड वेसल्स और फिल्टर करने वाले हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे धीरे-धीरे किडनी की काम करने की क्षमता कम हो सकती है। लगातार बैठने से ये जोखिम कारक सक्रिय हो जाते हैं।
ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिक दबाव
लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियां कम काम करती हैं और शरीर की कुल शारीरिक गतिविधि घट जाती है। ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। अगर खान-पान ठीक न हो एक्सरसाइज कम हो और नींद पूरी न हो तो शरीर में ऐसा मेटाबॉलिक माहौल बन सकता है जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खून का प्रवाह सही न होने से किडनी को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो नुकसान बढ़ सकता है। कई लोग इस पहलू पर ध्यान नहीं देते।
खतरा कब बढ़ जाता है
जब लगातार बैठने के साथ मोटापा डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर पहले से मौजूद हो तब खतरा काफी बढ़ जाता है। अनियमित खान-पान और व्यायाम की कमी स्थिति को और बिगाड़ती है। डेस्क जॉब वाले लोगों में ये समस्याएं आम हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर लंबे समय से बैठकर काम कर रहे हैं तो नियमित जांच कराना चाहिए। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। जोखिम कारकों को नियंत्रित करके किडनी को बचाया जा सकता है। समय रहते बदलाव अपनाना जरूरी है।
छोटे बदलाव से बड़ा फायदा
रोज़मर्रा में छोटे-छोटे बदलाव काफी फायदा पहुंचा सकते हैं। डेस्क जॉब वाले लोगों को लगातार कई घंटों तक बैठने से बचना चाहिए। बीच-बीच में उठकर थोड़ी देर चलें। फोन पर बात करते समय टहलें। जहां संभव हो लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। हफ्ते में नियमित तेज या मध्यम स्तर की एक्सरसाइज दिल और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखती है। ये आदतें किडनी पर दबाव कम करने में मदद करती हैं। सक्रिय जीवनशैली अपनाकर जोखिम काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।