भोपाल।राजधानी भोपाल में वायु प्रदूषण कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के दावों के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी सर्वे का परिणाम सामने आया है। देशभर के शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के आधार पर किए गए इस सर्वे में भोपाल को कोई रैंकिंग नहीं मिली। हालांकि, शहर के वार्ड-60 ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया और उसे 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली। वार्ड-32 का प्रदर्शन भी संतोषजनक बताया गया है।
देशव्यापी सर्वे में भोपाल को नहीं मिली जगह
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से देशभर के शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति और उसे नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का आकलन करने के लिए सर्वे कराया गया था। बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को रैंकिंग दी गई। भोपाल में सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, खुले में कचरा जलाने और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम की ओर से कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर को इस देशव्यापी रैंकिंग में स्थान नहीं मिलना प्रशासन के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
वार्ड-60 ने हासिल किया दूसरा स्थान
पूरे शहर की रैंकिंग में भोपाल को जगह नहीं मिली, लेकिन वार्ड-60 ने बेहतर प्रदर्शन किया। पर्यावरण सुधार और वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में किए गए कार्यों के आधार पर वार्ड-60 को सर्वे में दूसरा स्थान मिला। इस उपलब्धि के लिए वार्ड को 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। नगर निगम की ओर से एमआईसी मेंबर आरके सिंह बघेल ने नई दिल्ली में यह पुरस्कार प्राप्त किया। बताया गया कि वार्ड-60 को इससे पहले भी पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में सम्मान मिल चुका है। इससे वार्ड में किए जा रहे स्थानीय स्तर के प्रयासों का पता चलता है।
वार्ड-32 का प्रदर्शन भी बेहतर
भोपाल के वार्ड-32 का प्रदर्शन भी अन्य वार्डों की तुलना में बेहतर बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर किए जा रहे कुछ प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। हालांकि, कुछ वार्डों के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद पूरे भोपाल को देशव्यापी सर्वे में रैंकिंग नहीं मिलना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
धूल और वाहनों का प्रदूषण बड़ी चुनौती
भोपाल में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़क की धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती है। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने और निर्माण स्थलों से उड़ने वाले धूल कणों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। बारिश के बाद भी शहर की कई सड़कों पर मिट्टी और गंदगी जमा होने से धूल उड़ने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अभियान चलाने के बजाय नियमित निगरानी और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
शहर की रैंकिंग और वार्डों के प्रदर्शन में अंतर
भोपाल की समग्र रैंकिंग में स्थान नहीं मिलने के बावजूद वार्ड-60 का दूसरा स्थान हासिल करना एक अलग तस्वीर पेश करता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि कुछ वार्डों में किए जा रहे अच्छे प्रयासों को पूरे शहर में किस तरह लागू किया जा सकता है। अब चुनौती यह है कि वार्ड स्तर पर सफल उपायों को पूरे शहर में लागू कर वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार किया जाए।