मध्यप्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बनी दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम सोमवार, 3 अगस्त को सामने आएगा। 30 जुलाई को हुए मतदान के बाद अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं। चुनाव मैदान में आमने-सामने रहे भाजपा के नए चेहरे आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के अनुभवी नेता घनश्याम सिंह के बीच मुकाबले का फैसला अब मतों की गिनती के साथ होगा।
71.44 प्रतिशत मतदान, पिछले चुनाव से कम रही वोटिंग
दतिया उपचुनाव में कुल 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 9 प्रतिशत कम है। पिछले विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर लगभग 80 प्रतिशत मतदान हुआ था।इस बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद यह पहला चुनाव था। मतदान प्रतिशत में आई कमी को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से आंकलन कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि महिला मतदाताओं की कम भागीदारी का असर भाजपा को मिल रहे पारंपरिक समर्थन पर पड़ सकता है। पार्टी का तर्क है कि पिछले विधानसभा चुनाव में लाड़ली बहना योजना के कारण भाजपा को महिला वोटरों का मजबूत समर्थन मिला था। हालांकि, कम मतदान का फायदा किस दल को मिला, इसका वास्तविक जवाब मतगणना के बाद ही मिलेगा।
भाजपा के लिए नए चेहरे की परीक्षा
भाजपा ने इस उपचुनाव में आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। उनके सामने पार्टी के पारंपरिक जनाधार को बनाए रखने और नए मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती थी।भाजपा का पूरा फोकस सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और संगठन की ताकत के आधार पर चुनाव जीतने पर रहा। पार्टी नेताओं का दावा है कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है।
कांग्रेस को अनुभवी चेहरे से उम्मीद
वहीं कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। पार्टी को उम्मीद है कि स्थानीय मुद्दों, जनता की नाराजगी और संगठन की सक्रियता के आधार पर वह इस सीट पर वापसी कर सकती है।कांग्रेस इस चुनाव को अपने संगठन को मजबूत करने के अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मान रही है। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतारने पर जोर दिया।
अगले चुनावों की तैयारी पर पड़ेगा असर
हालांकि दतिया उपचुनाव का परिणाम प्रदेश सरकार के बहुमत या स्थिरता पर कोई सीधा असर नहीं डालेगा, लेकिन आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए यह दोनों दलों के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाने वाला साबित हो सकता है।जीत से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी, जबकि हार की स्थिति में दोनों पार्टियों को अपनी रणनीति और चुनावी तैयारियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
अब सोमवार को होने वाली मतगणना के बाद यह तय हो जाएगा कि दतिया की जनता ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को अपना प्रतिनिधि चुना है या कांग्रेस के घनश्याम सिंह को एक बार फिर मौका दिया है।