भोपाल: मध्यप्रदेश में रबी सीजन की बुआई से पहले किसानों के लिए यूरिया की उपलब्धता को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी और भारत को बड़ी मात्रा में आपूर्ति की पेशकश मिलने से खाद की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की खेती करने वाले किसानों को फायदा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें अगस्त में 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं, जो अब घटकर 352 से 356 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गई हैं। हालांकि, प्रदेश के सभी जिलों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता और समय पर वितरण की स्थिति सरकारी आपूर्ति तथा स्थानीय मांग पर निर्भर करेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में गिरावट
देश में यूरिया की जरूरत पूरी करने के लिए आयात भी किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए जारी टेंडर में कीमतें घटकर 352 से 356 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं।इससे पहले अगस्त में यूरिया की कीमतें 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। कीमतों में इस गिरावट से यूरिया आयात की लागत कम होने की संभावना है।
गेहूं, चना और सरसों की बुआई में मिलेगी राहत
मध्यप्रदेश में रबी सीजन के दौरान यूरिया की मांग बढ़ जाती है। गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों के लिए किसान बुआई और फसल की बढ़वार के दौरान उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं।चंबल, मालवा, नर्मदापुरम और बुंदेलखंड जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में सीजन के दौरान खाद की मांग अधिक रहती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक और समय पर वितरण होने से किसानों को खाद खरीदने के लिए लंबी कतारों में लगने तथा बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।प्रदेश के किसानों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि मांग बढ़ने के समय सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध रहे।
किसानों के लिए यूरिया की कीमत में बदलाव नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने के बावजूद भारतीय किसानों को मिलने वाले यूरिया की निर्धारित खुदरा कीमत में तत्काल बदलाव की जानकारी नहीं है।सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार, 45 किलोग्राम यूरिया बैग की कीमत 242 रुपये है। आयात की लागत घटने का सीधा लाभ किसानों को कम खुदरा कीमत के रूप में मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि यूरिया की कीमत और सब्सिडी व्यवस्था केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।इसलिए किसानों को फिलहाल निर्धारित खुदरा दर पर ही यूरिया मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए।
सरकार को उर्वरक सब्सिडी में मिल सकती है राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट से यूरिया के आयात पर होने वाला खर्च कम हो सकता है। इससे सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का आर्थिक बोझ घटने की संभावना है।सरकार किसानों को नियंत्रित कीमत पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी देती है। ऐसे में आयात लागत कम होने से सरकारी खर्च पर राहत मिल सकती है। इसके साथ ही खाद के भंडारण, परिवहन और वितरण की बेहतर व्यवस्था किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
खाद की कालाबाजारी रोकना भी होगी चुनौती
रबी सीजन में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही कई क्षेत्रों में यूरिया की उपलब्धता को लेकर दबाव बन जाता है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक के साथ वितरण केंद्रों की नियमित निगरानी और कालाबाजारी पर नियंत्रण भी जरूरी है।कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि किसानों को निर्धारित दर पर खाद मिले और जरूरत के समय पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध रहे।