मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नया फायर एक्ट लागू किया है। कानून के तहत दमकल सेवाओं की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आम नागरिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला इमारतों के लिए भी अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं।नए प्रावधानों का उद्देश्य आगजनी की घटनाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना और फायर सेफ्टी व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
प्रॉपर्टी टैक्स के साथ देना होगा फायर टैक्स
नए कानून के तहत नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद जैसे स्थानीय निकायों को संपत्ति कर के साथ सरचार्ज के रूप में फायर टैक्स वसूलने का कानूनी अधिकार दिया गया है।फायर टैक्स की दरें राज्य सरकार निर्धारित करेगी। इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल दमकल सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और 10 मिनट के भीतर रिस्पॉन्स टाइम सुनिश्चित करने की दिशा में किया जाएगा।
झूठी फायर कॉल पर 20 हजार तक जुर्माना
नए फायर एक्ट में फायर ब्रिगेड को गुमराह करने और झूठी सूचना देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।धारा 18-1 के तहत फॉल्स अलार्म या झूठी फायर कॉल करने पर 20 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य फायर ब्रिगेड के संसाधनों के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
दमकलकर्मियों की लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
नए कानून में फायर सर्विस कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। ड्यूटी के दौरान बिना उचित कारण काम छोड़कर जाने या लापरवाही बरतने वाले दमकलकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।ऐसे मामले में 3 महीने तक की जेल, 3 महीने की वेतन कटौती या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है।
आग से दूसरे की संपत्ति को नुकसान हुआ तो देना होगा मुआवजा
यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही के कारण आग लगती है और उससे पड़ोसी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो जिम्मेदार व्यक्ति से नुकसान की भरपाई कराई जा सकेगी।पीड़ित व्यक्ति 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष दावा कर सकता है। दावे का निस्तारण अधिकतम 90 दिन में किया जाएगा और इसका प्रभाव सिविल कोर्ट की डिक्री जैसा होगा।
बहुमंजिला इमारतों और अस्पतालों में फायर सुपरवाइजर जरूरी
नए एक्ट के तहत बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और व्यावसायिक परिसरों में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी सुपरवाइजर की नियुक्ति अनिवार्य होगी।निर्धारित समय में सुपरवाइजर की नियुक्ति नहीं करने पर 10 रुपए प्रति वर्ग मीटर की पेनल्टी लगाई जाएगी। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं होने पर 10 हजार रुपए प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए निजी एजेंसियों को लाइसेंस
इमारतों के फायर प्लान, सेफ्टी ऑडिट और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था को भी नए कानून के तहत व्यवस्थित किया जाएगा। सरकार मान्यता प्राप्त निजी एजेंसियों को इसके लिए लाइसेंस जारी कर सकेगी।इससे भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच और प्रमाणन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा।
15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी
नए कानून के तहत 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली रिहायशी इमारतों के अलावा स्कूल, अस्पताल, मॉल और फैक्ट्रियों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।फायर NOC के बिना नगरीय निकाय ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकेंगे। यानी भवन के उपयोग से पहले अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
शादी और धार्मिक आयोजनों के पंडालों पर भी नियम लागू
शादी-ब्याह, राजनीतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों के पंडालों को सेल्फ-रेगुलेटरी श्रेणी में रखा गया है।आयोजकों को अग्निरोधी कपड़ों का इस्तेमाल करना होगा और पंडाल में निकास द्वार पर्याप्त चौड़े रखने होंगे, ताकि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
पुलिस थानों की तर्ज पर बनेंगे फायर स्टेशन
नए फायर एक्ट के तहत प्रदेश की घनी आबादी और औद्योगिक क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।इन फायर स्टेशनों को पुलिस थानों की तर्ज पर स्पष्ट क्षेत्राधिकार और कमान व्यवस्था के साथ विकसित करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों की पहुंच और प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाना है।