मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब जो शिक्षक ऑनलाइन ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करेंगे, उनका वेतन रोका या काटा जा सकता है। वहीं, बिना ई-अटेंडेंस के यदि किसी शिक्षक का वेतन देयक तैयार कर भुगतान के लिए भेजा जाता है तो संबंधित संकुल प्राचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में निलंबन तक की कार्रवाई संभव है।
लोक शिक्षण आयुक्त ने जारी किए सख्त निर्देश
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। साथ ही ऐसे संकुल प्राचार्यों की जानकारी भी मांगी गई है, जिन्होंने ई-अटेंडेंस व्यवस्था के पालन में लापरवाही बरती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों में ई-अटेंडेंस का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
एक जुलाई से अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू हुआ नियम
स्कूल शिक्षा विभाग ने एक जुलाई से विभागीय कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है। शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था पहले से लागू है। विभाग के अनुसार शुरुआती तकनीकी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है और एक सप्ताह बाद पूरे सिस्टम की समीक्षा भी की जाएगी।
करीब 10 प्रतिशत शिक्षक नहीं लगा रहे थे ऑनलाइन उपस्थिति
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ई-अटेंडेंस अनिवार्य होने के बावजूद लगभग 10 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे थे। विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। इसी कारण अब ई-अटेंडेंस को सीधे वेतन भुगतान प्रक्रिया से जोड़ने का फैसला लिया गया है।
शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी स्वीकार कर चुके हैं कि कुछ शिक्षक स्वयं स्कूल नहीं जाते और अपने स्थान पर दूसरे लोगों को पढ़ाने भेज देते हैं। वहीं कई शिक्षक नियमित रूप से देर से विद्यालय पहुंचते हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।
ई-अटेंडेंस का विरोध करने वालों को नहीं मिली राहत
विभाग के अनुसार "हमारे शिक्षक" ऐप के माध्यम से लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था का कुछ शिक्षकों ने विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब विभाग ने इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए इसे वेतन भुगतान से जोड़ दिया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि समय पर कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में संबंधित संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।