अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला 21 जनवरी को नए मंदिर में पहुंच जाएंगे। इस दिन भक्तों को दर्शन नहीं मिल पाएंगे। इसकी सूचना ट्रस्ट की ओर से भक्तों को दी जाएगी। अचल मूर्ति को सोने के सिंहासन पर कमल के आसन पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। इसके ठीक सामने सोने के सिंहासन पर विराजमान रामलला चारों भाइयों के साथ विराजित रहेंगे। रोजाना दोनों मूर्तियों की पूजा होगी। रामलला पंचकोसी परिक्रमा करेंगे। प्रमुख मंदिरों के दर्शन भी करेंगे। विभिन्न नदियों के जल से स्नान कराया जाएगा। यह स्नान सरयू तट पर होगा या फिर मंदिर में, यह तय किया जाना है।
प्राण प्रतिष्ठा से पहले हनुमानगढ़ी की बढ़ाई गुई सुरक्षा
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले हनुमानगढ़ी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। परिसर की निगरानी 25 सीसीटीवी कैमरों से हो रही है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की अब चेकिंग भी होने लगी है। पुरुष व महिला श्रद्धालुओं को अलग-अलग कतार में दर्शन कराया जा रहा है। हनुमानगढ़ी के प्रवेश द्वार पर जांच के लिए आधुनिक मशीनें भी लगाई गई हैं। सिविल पुलिस के साथ पीएसी सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। रामनगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ का सर्वाधिक दवाब सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में रहता है।
यूरोप के छोटे से देश से 15 युवाओं का समूह पहुंचा रामनगरी
श्रीराम की एक झलक पाने को देशभर के श्रद्धालुओं के साथ अब विदेशी मेहमान भी पहुंचने लगे हैं। ये मेहमान उन देशों से आ रहे हैं, जिनका नाम तक स्थानीय लोगों को इंटरनेट पर खोजना पड़ रहा है। ऐसे में इसे श्रीराम का चमत्कार समझा जाए या विश्व पटल पर युगों से विद्यमान उनके यश का प्रमाण। सात समंदर पार कर लोग उन्हें प्रणाम करने धाम तक आ रहे हैं।
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