लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले देश में 'सीएए' के नियम लागू हो जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के नियमों को तैयार करने के लिए लोकसभा में अधीनस्थ कानून पर संसदीय समिति की तरफ से एक और विस्तार मिला है। पिछले सेवा विस्तार की अवधि 9 जनवरी को खत्म हो गई है। सीएए नियमों के लिए इस बार गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार मिला है। इससे पहले राज्यसभा से भी गृह मंत्रालय को उक्त विषय पर नियम बनाने व लागू कराने के लिए 6 महीने का विस्तार मिला था।
गृह मंत्रालय ने होमवर्क पूरा कर लिया
सूत्रों का कहना है कि संसद में बजट सत्र के दौरान सीएए नियम, दोनों सदनों में रखे जाएंगे। सीएए को लेकर सभी नियम तैयार हैं। जिस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे जाएंगे, वह प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। पिछले दिनों केंद्र सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया था कि देश में लोकसभा चुनाव से पहले 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' (सीएए) के नियम लागू हो जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। संसद के बजट सत्र के दौरान, दोनों सदनों के पटल पर नियमों को रखने के बाद इन्हें फरवरी में लागू कर दिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय को मिला सातवीं बार विस्तार
ऐसे अल्पसंख्यक, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों, उन्हें स्थानीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 से 6 साल किया गया है। यह कानून, अभी तक इसलिए लागू नहीं हो सका, क्योंकि सीएए के तहत बनाए जा रहे नियमों को अंतिम रूप प्रदान नहीं किया जा सका। राज्यसभा और लोकसभा में अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नियम तैयार करने के लिए सातवीं बार विस्तार दिया है।
जून 2020 में मिला था पहला विस्तार
सीएए, किसी व्यक्ति को खुद नागरिकता नहीं देता है। इसके जरिए पात्र व्यक्ति, आवेदन करने के योग्य बनता है। यह कानून उन लोगों पर लागू होगा, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए थे। इसमें प्रवासियों को वह अवधि साबित करनी होगी कि वे इतने समय में भारत में रह चुके हैं। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि वे अपने देशों से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हैं। वे लोग उन भाषाओं को बोलते हैं, जो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हैं। उन्हें नागरिक कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को भी पूरा करना होगा। इसके बाद ही प्रवासी आवेदन के पात्र होंगे। किसी भी कानून को राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद उसके नियम छह माह के भीतर बनाए जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो संसदीय समितियों से विस्तार की मांग की जाती है। सीएए नियमों के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को सबसे पहला विस्तार जून 2020 में दिया गया था।
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