हरियाणा में कांग्रेस और महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन की करारी हार के बाद विपक्ष खेमे में खलबली मची है। गठबंधन के निशाने पर कांग्रेस है। सबसे पहले मोर्चा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमखु ममता बनर्जी ने खोला है। उन्होंने इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करने की इच्छा जाहिर कर कांग्रेस को बड़ी चुनौती दी है । टीएमसी प्रमुख ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह बंगाल से ही गठबंधन की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं। ममता बनर्जी के इस ख्वाहिश को उनका एग्जिट प्लान माना जा रहा है। जाहिर तौर पर टीएमसी के नेतृत्व को कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी और दीदी का बाहर जाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
दीदी की दावेदारी से पहले ही टीएमसी ने दिखाए थे तेवर
2025 में होने वाले दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाकर ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन को हिला दिया है। एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू में ममता दीदी ने कहा कि उन्होंने ही इंडिया ब्लॉक को बनाया है। अब इसे संभालने की जिम्मेदारी नेतृत्व करने वालों पर हैं। मगर वे इसे नहीं चला सकते तो वह क्या कर सकती हैं? कुछ दिन पहले टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का स्वाभाविक नेता बताया था। तृणमूल नेताओं का दावा है कि ममता दीदी के नेतृत्व में ही इंडिया गठबंधन बीजेपी का मुकाबला कर सकता है। पिछले दिनों लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान टीएमसी ने अडाणी के मुद्दे पर अलग स्टैंड लिया था।
समाजवादी पार्टी ने दिया ममता बनर्जी का साथ
उम्मीद के मुताबिक, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने ममता दीदी के दावे को खारिज कर दिया है। मसूद का कहना है कि ऑल इंडिया लेवल की पार्टी होने के कारण कांग्रेस नेता राहुल गांधी गठबंधन के नैसर्गिक नेता हैं। इस शुरुआती जंग में यूबीटी नेता संजय राउत ने भी कांग्रेस का पक्ष लिया है, जबकि सपा ने दीदी का समर्थन किया है। महाराष्ट्र के सपा नेता अबू आजमी ने साफ किया कि वह अखिलेश यादव से इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने की अपील करेंगे। वहीं, एक अन्य नेता ने ममता दीदी के लीडरशीप पर मुहर लगा दी है।
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