महाकुंभ में मौनी अमावस्या के बाद फिर से श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। संगम के किनारे जहां नावों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, वहीं घाटों पर बड़ी संख्या में लोग स्नान करने पहुंच रहे हैं। इस बीच, साइबेरियाई पक्षी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के पास अपनी खूबसूरती से इन नदियों के दृश्य में चार चांद लगा रहे हैं। इन पक्षियों ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है।
कहां से आते हैं ये साइबेरियाई पक्षी?
साइबेरियाई पक्षी, जिन्हें " माइग्रेटरी बर्ड " भी कहा जाता है, सर्दियों के मौसम में साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके भारत आते हैं। ये पक्षी अक्टूबर के आखिरी दिनों से भारत पहुंचना शुरू होते हैं और ठंड के मौसम तक यहां रहते हैं। प्रयागराज में इनका अधिकांश जमावड़ा संगम के आस-पास देखा जाता है। इन पक्षियों का झुंड दिनभर भोजन करता है और अपनी मधुर आवाज़ से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। इनकी तंत्रिकाएं मनुष्यों के मुकाबले अधिक सक्रिय और सटीक होती हैं।
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या
महाकुंभ के दौरान संगम में पवित्र स्नान करने वालों की संख्या अब 40 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 7 फरवरी को 48 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर डुबकी लगाई। यह संख्या अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
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