रामपुर अंग्रेजी शासन के दौरान देश की मशहूर रियासतों में से एक था। रामपुर की पतंग की धाक देश के हर कोने में है। रामपुर की पतंगों पर की जाने वाली कारीगरी की वजह से ये देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भी रामपुर की पतंगों के स्टॉल लगाये जाते हैं।
आसमान भगवा रंग से ढका हुआ दिखाई देगा
इस बार मकर संक्रांति के दिन आसमान रंग बिरंगा ही नही बल्कि भगवा रंग से ढका हुआ दिखाई देगा। इस दिन आसमान में सैकड़ो रंग बिरंगी पतंगे उड़ाई जाती है। लेकिन इस साल पूरा आसमान भगवा रंग में रंगमयी होगा। आसिफ मियां के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति से पहले ही भगवा रंग की पतंग की ज्यादा डिमांड है। रामपुर की पतंग सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि विदेशों के आसमान में भी खूब लहरा रही है। खासकर गुजरात, पंजाब आयरलैंड, इंग्लैंड, रूटलैंड, स्कॉटलैंड में बड़े पैमाने पर रामपुर की पतंग का निर्यात हो रहा है। रामपुर में करीब 5 से 10 हजार लोग पतंग करोबार से जुड़े हुए हैं और आठ बड़े-बड़े कारखाने हैं।
सेंट्रल गवर्नमेंट से उन्हें पेंशन भी मिलती रही
आसिफ मियां ने कहा कि, रामपुर में पतंग की इंडिया की सबसे बड़ी मार्केट है। यह काम उनके पिता जी चांद मियां ने शुरू किया था। वह हर तरह की डिजाइनदार पतंग बनाने में माहिर थे और इस कला की बदौलत उन्हें अमेरिका में 1985 श्रेष्ठ शिल्प के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया और जब तक वह जिंदा रहे सेंट्रल गवर्नमेंट से उन्हें पेंशन भी मिलती रही। आसिफ मिया ने पतंग बनाने के साथ-साथ पतंगबाजी में भी बड़े बड़े आयाम स्थापित किये। उन्होंने पहले ऑल इंडिया बरेली से अवॉर्ड जीता और फिर लखनऊ से और लोकल से तो 7 से 8 अवार्ड जीत चुके हैं।
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