केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात दौरे के दौरान सनातन धर्म को लेकर एक सशक्त और भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के सनातन धर्म, उसकी संस्कृति और लोगों की आस्था को समाप्त करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। अमित शाह ने सनातन को सूरज और चांद की तरह अमर बताते हुए कहा कि यह धर्म समय, आक्रमण और अत्याचार—हर परीक्षा में अडिग रहा है और आगे भी रहेगा।
सोमनाथ मंदिर: आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक
अमित शाह ने अपने वक्तव्य में सोमनाथ मंदिर का विशेष उल्लेख किया, जो भारतीय आस्था और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि बीते हजार वर्षों में सोमनाथ मंदिर को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार उसका पुनर्निर्माण हुआ। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन लोगों ने मंदिर पर आक्रमण किए, वे स्वयं मिट गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी उसी स्थान पर पूरे गौरव और सम्मान के साथ खड़ा है।
सोलह बार टूटा, सोलह बार बना इतिहास
गृह मंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर को इतिहास में लगभग 16 बार ध्वस्त किया गया और हर बार उसे फिर से खड़ा किया गया। यह केवल एक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं था, बल्कि यह सनातन संस्कृति की जीवटता, समाज की एकजुटता और आस्था की शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण बताया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का ऐतिहासिक संदर्भ
अमित शाह ने बताया कि 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शुभारंभ किया है। यह पर्व महमूद गजनी द्वारा वर्ष 1026 में किए गए आक्रमण और उसके बाद हुए पुनर्निर्माण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। यह आयोजन इतिहास को स्मरण करने के साथ-साथ सांस्कृतिक स्वाभिमान को पुनः जागृत करने का प्रयास है।
गुजरात में विकास और सांस्कृतिक चेतना का संगम
गुजरात दौरे के दौरान अमित शाह ने गांधीनगर में 267 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं। एक ओर आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है, तो दूसरी ओर सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को भी नई ऊर्जा और पहचान मिल रही है।
इतिहास से वर्तमान तक का स्पष्ट संदेश
अमित शाह के इस बयान को केवल ऐतिहासिक टिप्पणी नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और आस्था में बसती है, जिसे कोई भी शक्ति समाप्त नहीं कर सकती। सोमनाथ मंदिर इसका सबसे सशक्त उदाहरण है, जो बताता है कि सनातन धर्म केवल अतीत नहीं, बल्कि सतत वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य है।
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