नई दिल्ली/कोलकाता: ग्रामीण इलाकों में रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। पहले से चली आ रही 100 दिनों की रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के स्थान पर अब 125 दिनों की मजदूरी आधारित रोजगार गारंटी योजना शुरू की जा रही है। लेकिन इस बार सरकार ने भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए एक कड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है।
आगामी 1 जुलाई से शुरू होने जा रहे 'विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी VB-GRAM (वीबी-जी राम जी) प्रोजेक्ट के तहत अब जॉब कार्ड धारकों को काम और मजदूरी तभी मिलेगी, जब वे 'फेस ऑथेंटिकेशन' (Face Authentication) के जरिए अपनी पहचान सत्यापित (Verify) करेंगे। ठीक उसी तरह जैसे आजकल लोग अपना मोबाइल फोन या ऐप एक्टिव करने के लिए अपना चेहरा स्कैन करते हैं। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल सहित देशभर के जिलों में जॉब कार्ड धारकों का बड़े पैमाने पर ई-केवाईसी (e-KYC) किया जा रहा है।
मैनुअल हाजिरी खत्म, डिजिटल डिवाइस से स्कैन होगा चेहरा
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नए नियम के तहत अब लाभार्थियों को 'एनएमएमएस' (NMMS) मोबाइल ऐप के जरिए प्रतिदिन अपना 'फेस ऑथेंटिकेशन' करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर वे काम के हकदार नहीं होंगे।
पहले 100 दिनों के काम में श्रमिकों की उपस्थिति (मस्टर रोल) वेब पोर्टल पर मैन्युअल तरीके से भरी जाती थी। लेकिन अब पूरी तरह से बायोमेट्रिक और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मोबाइल या लैपटॉप में मौजूद NMMS ऐप के जरिए सीधे मजदूर के चेहरे को स्कैन कर उसकी पहचान की पुष्टि की जाएगी।
'आप असल में आप ही हैं या नहीं' इसकी होगी जांच:राज्य के पंचायत विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, *"पहले श्रमिकों की उपस्थिति मैन्युअल होने के कारण बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा होता था। जॉब कार्ड धारक के बदले कोई दूसरा व्यक्ति काम कर लेता था और पैसा असली उपभ उपभोक्ता के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता था। लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था में लाभार्थी की लाइव फोटो ली जाएगी और उसे डेटाबेस में सुरक्षित तस्वीर से मिलाया जाएगा। मैच होने पर ही काम की अनुमति मिलेगी। सीधे शब्दों में कहें तो यह 'आप वास्तव में आप ही हैं' यह सुनिश्चित करने का सबसे सुरक्षित डिजिटल तरीका है, जिसे जालसाजी से नहीं बदला जा सकता।"
चुनौती: इंटरनेट 'शैडो जोन' बन सकता है रुकावट
इस पूरी हाई-टेक व्यवस्था में एक ही तकनीकी पेंच है कि इसके लिए कार्यस्थल पर इंटरनेट का होना बेहद जरूरी है। पश्चिम बंगाल के विशेष रूप से जंगलमहल और पहाड़ी (दार्जिलिंग) इलाकों में आज भी कई ऐसे 'मोबाइल शैडो जोन' (जहाँ नेटवर्क नहीं आता) मौजूद हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में शुरुआती स्तर पर इस नियम को लागू करने में थोड़ी समस्या आ सकती है।
पुरानी योजना (100 दिन) के मुकाबले कितना अलग है नया प्रोजेक्ट?
केंद्र सरकार ने इस योजना को पारदर्शी और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:
कृषि सीजन के अलावा 60 दिन काम: इस नई योजना में जॉब कार्ड धारकों को गैर-कृषि सीजन (जब खेती का काम नहीं होता) के दौरान कम से कम 60 दिनों का काम देना अनिवार्य होगा। पुरानी योजना में ऐसा कोई स्पष्ट वर्गीकरण नहीं था।
राज्य स्तर से सीधे निगरानी: इस योजना की मॉनिटरिंग सीधे राज्य स्तर से की जाएगी। मुख्य सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों की देखरेख में बनी एक विशेष 'स्टीयरिंग कमेटी' इस पूरे प्रोजेक्ट का सुपरविजन करेगी।
'युक्तिधारा' पोर्टल का इस्तेमाल: पहले काम का पूरा डेटा 'NREGASoft' पर दर्ज होता था, लेकिन अब इस डेटा को पहले **'युक्तिधारा' (Yuktidhara) पोर्टल पर लिस्टेड किया जाएगा, जिसके बाद यह NREGASoft पर उपलब्ध होगा।
पीएम गतिशक्ति से तालमेल: ग्राम सभा के प्रस्तावों के साथ-साथ 'पीएम गतिशक्ति पोर्टल' (PM Gati Shakti) से मिलने वाले इनपुट्स के आधार पर ही 'विकसित भारत ग्राम पंचायत योजना' तैयार की जाएगी और काम आवंटित होंगे।