मृत सागर धरती पर मौजूद उन प्राकृतिक स्थलों में से है जिन्हें देखकर विज्ञान भी हैरान रह जाता है। इज़रायल और जॉर्डन की सीमा पर स्थित यह खारा जलाशय समुद्र तल से लगभग चार सौ मीटर नीचे है, जिसके कारण इसे पृथ्वी का सबसे निचला स्थान कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यधिक नमक स्तर है, जिसकी वजह से यहां किसी भी प्रकार का जीवित प्राणी पनप नहीं पाता। यही कारण है कि इसे मृत सागर का नाम दिया गया। यहां का पानी सामान्य समुद्री जल की तुलना में आठ से दस गुना अधिक खारा है, जो किसी भी जीव के जीवित रहने की संभावना को समाप्त कर देता है।
नासा की निगाह से मृत सागर का स्वरूप
अंतरिक्ष से ली गई नासा की तस्वीरें इस अनोखी झील के रंग, संरचना और बदलते स्वरूप को बिल्कुल स्पष्ट कर देती हैं। वर्षों के अंतराल पर ली गई तस्वीरों में कभी गहरा नीला जल नजर आता है, तो कहीं हल्के नीले, गुलाबी और चमकीले हरे रंग इसकी संरचना में हुए बदलावों की ओर संकेत करते हैं। इन तस्वीरों में बीच में स्थित लिसान प्रायद्वीप भी साफ दिखाई देता है, जो मृत सागर को दो हिस्सों में बांटता है और एक प्राकृतिक पुल जैसा आकार बनाता है। गर्मियों में यहां का पानी तीव्र गति से वाष्पित होता है, जिसके कारण जलस्तर प्रतिदिन दो से तीन सेंटीमीटर तक कम हो सकता है, और यही वजह है कि दशकों में इसकी गहराई लगातार घट रही है।
विलुप्त होता जलस्तर और बदलता भूगोल
मृत सागर का जलस्तर तेजी से घट रहा है, और विज्ञान के अनुसार आने वाले वर्षों में इसका स्वरूप और भी बदल सकता है। अत्यधिक सूखे, गर्म मौसम और वाष्पीकरण के कारण इसकी सतह सिकुड़ती जा रही है। जलस्तर में लगातार गिरावट से आसपास के क्षेत्रों का भूगोल भी प्रभावित हो रहा है तथा कई स्थानों पर सिंकहोल बनने जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलस्तर में यह कमी आने वाले समय में और गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है।
इतिहास में मृत सागर का महत्व
मृत सागर सिर्फ एक प्राकृतिक स्थान नहीं, बल्कि इतिहास और सभ्यता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। हजारों वर्ष पूर्व मिस्रवासी इसके नमक का उपयोग ममी संरक्षित करने में करते थे। इसके अलावा प्राचीन संस्कृतियों में इसका उल्लेख औषधीय उपयोग, सौंदर्य उपचार और कृषि से जुड़ा मिलता है। समय के साथ यहां से प्राप्त होने वाले नमक, पोटाश और अन्य खनिज पदार्थ उद्योगों में अत्यंत उपयोगी साबित हुए हैं, जो आज भी व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं।
खनिज संपदा और आधुनिक उपयोग
मृत सागर से प्राप्त नमक और खनिजों का आज के समय में विभिन्न उद्योगों में उपयोग किया जा रहा है। यहां से निकाला जाने वाला सोडियम क्लोराइड पानी की शुद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। पोटाश का उपयोग खाद निर्माण में किया जाता है और कई रासायनिक उद्योगों में मृत सागर के खनिजों की विशेष मांग रहती है। पिछले चार दशकों में यहां नमक निकालने के बड़े प्रोजेक्ट्स ने इसकी आर्थिक उपस्थिति को और भी मजबूत किया है, जिसका प्रभाव सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ देखा जा सकता है।
अद्भुत, रहस्यमयी और संसार से अलग
मृत सागर सिर्फ एक खारा जलाशय नहीं, बल्कि विज्ञान, इतिहास, भूगोल और पर्यावरण का अद्वितीय संगम है। यह धरती के उन दुर्लभ स्थलों में से एक है, जो अपने अस्तित्व में ही एक रहस्य समेटे हुए हैं। यहां की मूक जलधारा, बदलते रंग, घटती गहराई और अनोखी संरचना इसे प्रकृति का अनमोल उपहार बनाती है, जिसकी रक्षा और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
Comments (0)