नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सभी 156 टोल नाकों पर जल्द ही मल्टी-लेयर फ्री फ्लो अर्थात एमएलएफएफ तकनीक लागू की जाएगी, जिससे वर्षों से चली आ रही लंबी कतारों और यातायात जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। यह प्रणाली पारंपरिक टोल प्लाजा मॉडल से अलग है, जहां प्रत्येक वाहन को शुल्क भुगतान के लिए रुकना पड़ता था। नई तकनीक में वाहनों की आवाजाही बिना किसी अवरोध के जारी रहेगी और स्वचालित डिजिटल प्रणाली वाहन की पहचान कर तत्काल टोल शुल्क वसूल लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से केवल यात्रा समय ही कम नहीं होगा, बल्कि राजधानी की यातायात व्यवस्था अधिक आधुनिक, दक्ष और पर्यावरण अनुकूल भी बनेगी।
क्या है मल्टी-लेयर फ्री फ्लो तकनीक और कैसे करेगी काम
मल्टी-लेयर फ्री फ्लो प्रणाली आधुनिक डिजिटल टोल प्रबंधन का ऐसा मॉडल है जिसमें वाहनों की संख्या और यातायात के दबाव के अनुसार बहु-स्तरीय लेन व्यवस्था विकसित की जाती है। इस प्रणाली में उच्च क्षमता वाले कैमरे, सेंसर, रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक तथा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन प्रणाली एक साथ कार्य करती हैं। जैसे ही कोई वाहन टोल क्षेत्र में प्रवेश करेगा, उसकी नंबर प्लेट स्वतः स्कैन हो जाएगी और वाहन पर लगे आरएफआईडी टैग की पहचान करके निर्धारित टोल शुल्क सीधे डिजिटल माध्यम से काट लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में वाहन को रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे टोल पार करने का समय कुछ ही सेकंड तक सीमित रह जाएगा।
आरएफआईडी और नंबर प्लेट पहचान प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था में डिजिटल पहचान प्रणाली को विशेष महत्व दिया गया है। टोल नाकों पर स्थापित अत्याधुनिक कैमरे प्रत्येक वाहन की नंबर प्लेट को उच्च सटीकता के साथ पढ़ेंगे, जबकि आरएफआईडी टैग वाहन की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करेगा। इन दोनों प्रणालियों के एकीकृत संचालन से गलत शुल्क वसूली, फर्जी पहचान और भुगतान संबंधी विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इसके अतिरिक्त संपूर्ण टोल संग्रह प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे राजस्व प्रबंधन अधिक पारदर्शी बनेगा और प्रशासन को यातायात संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करने में भी सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह प्रणाली स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और बुद्धिमान यातायात प्रबंधन तंत्र का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
नए नियमों के तहत बढ़ेगी जवाबदेही, उल्लंघन पर लगेगा पांच गुना जुर्माना
नई टोल नीति के साथ नियमों को भी पहले की तुलना में अधिक सख्त बनाया जा रहा है। यदि किसी वाहन की नंबर प्लेट क्षतिग्रस्त, अस्पष्ट अथवा जानबूझकर छिपाई हुई पाई जाती है, या कोई चालक टोल कर्मचारियों अथवा नगर निगम के अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो उस पर प्रति प्रवेश टोल शुल्क का पांच गुना तक जुर्माना लगाया जाएगा। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम 500 रुपये तक का दंड निर्धारित था, लेकिन नई व्यवस्था में इसे कहीं अधिक प्रभावी बनाया गया है। प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि टोल कर्मचारियों की सुरक्षा, अनुशासन और डिजिटल व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी मजबूत करना है। इससे टोल संचालन के दौरान होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
मल्टी-लेन व्यवस्था से कम होगा जाम, ईंधन और समय दोनों की होगी बचत
राजधानी के व्यस्त प्रवेश मार्गों पर प्रतिदिन लाखों वाहन गुजरते हैं, जिसके कारण टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लगना सामान्य बात रही है। मल्टी-लेयर फ्री फ्लो प्रणाली के अंतर्गत बहु-लेन व्यवस्था विकसित होने से एक साथ अधिक संख्या में वाहन बिना रुके टोल पार कर सकेंगे। इससे यात्रा समय में कमी आएगी, ईंधन की अनावश्यक खपत घटेगी और वाहन चालकों की उत्पादकता में भी सुधार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार टोल पर वाहनों के बार-बार रुकने और पुनः गति पकड़ने से सर्वाधिक ईंधन व्यय और कार्बन उत्सर्जन होता है। नई व्यवस्था इस समस्या को काफी हद तक समाप्त करेगी, जिससे राजधानी की सीमा से लगे क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
डिजिटल टोल प्रणाली से नगर निगम की आय और प्रबंधन होगा अधिक प्रभावी
नई नीति के तहत व्यावसायिक वाहनों के मूल टोल शुल्क में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त नगर निगम को आवश्यकता पड़ने पर बड़े व्यावसायिक वाहनों के टोल शुल्क में 2,000 रुपये तक की वृद्धि करने का अधिकार भी प्राप्त होगा। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से राजस्व संग्रह अधिक पारदर्शी होगा, नकद लेनदेन में कमी आएगी और राजस्व रिसाव जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही प्राप्त अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग सड़क अवसंरचना, यातायात प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के विकास में किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह देश के अन्य महानगरों के लिए भी आधुनिक टोल प्रबंधन का एक सफल मॉडल सिद्ध हो सकती है।