नई दिल्ली. दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर अपना विस्तार कर रहा है और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी कुछ दिनों में इसकी प्रगति और तेज होने की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने संकेत दिया है कि फिलहाल मानसून ने उत्तर-पश्चिम भारत के सभी क्षेत्रों को पूरी तरह अपने प्रभाव में नहीं लिया है, लेकिन वातावरण में बन रही अनुकूल परिस्थितियां जल्द ही व्यापक वर्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर से लगातार आ रही नमी तथा बदलते वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण उत्तर भारत के अनेक राज्यों में मौसम का स्वरूप तेजी से बदलने की संभावना व्यक्त की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की मौजूदा स्थिति सामान्य मौसमी प्रक्रिया का हिस्सा है और अगले सप्ताह तक वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में पांच दिन तक बदले-बदले रहेंगे मौसम के तेवर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक मौसम आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। दिन के समय धूप और उमस बनी रहने के बाद दोपहर एवं शाम के समय तेज हवाएं चलने तथा कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना जताई गई है। 27 जून के साथ-साथ 1 और 2 जुलाई के दौरान वर्षा की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के मौसम की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वर्षा लंबे समय से जारी भीषण गर्मी और उमस से राहत प्रदान करेगी, साथ ही अधिकतम तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय होगा बारिश का दौर
मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मौसम के बदलते स्वरूप का संकेत दिया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी हुई है। वहीं राजस्थान के पश्चिमी जिलों के लिए वर्षा, आंधी और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया गया है। 28 जून से 2 जुलाई के बीच पश्चिमी राजस्थान में तेज हवाओं की गति लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भी इसी प्रकार की मौसमी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी आगामी दिनों में वर्षा का दायरा बढ़ने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने के साथ-साथ जलस्रोतों में भी सुधार होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
उत्तराखंड सहित कई राज्यों में बनेगी तेज बारिश के लिए अनुकूल स्थिति
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तराखंड में 30 जून से 2 जुलाई के बीच गरज-चमक, आकाशीय बिजली और वर्षा की संभावना व्यक्त की है। इसके साथ ही गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त क्षेत्रों में भी अगले तीन से चार दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने का अनुमान लगाया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान प्रणाली अपेक्षित रूप से सक्रिय होती है तो इन राज्यों में वर्षा की तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उपग्रह चित्रों ने स्पष्ट की मानसून की वर्तमान स्थिति
हाल ही में प्राप्त उपग्रह चित्रों से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि मध्य भारत, बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों में मानसूनी बादलों का घना विस्तार बना हुआ है। इसके विपरीत दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के बड़े हिस्सों में अभी भी आसमान अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि मानसून कमजोर पड़ गया है, बल्कि इसका विस्तार अभी क्रमिक रूप से उत्तर-पश्चिम दिशा में जारी है। मानसून की आधिकारिक प्रगति केवल किसी एक शहर में हुई वर्षा से निर्धारित नहीं होती, बल्कि व्यापक क्षेत्र में नमी, हवाओं की दिशा, निरंतर वर्षा और वायुमंडलीय परिस्थितियों के समग्र विश्लेषण के आधार पर तय की जाती है।
बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया मौसम तंत्र बढ़ा सकता है बारिश की रफ्तार
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की मौजूदा धीमी गति का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी के ऊपर अभी तक किसी मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र का विकसित न होना है। सामान्यतः ऐसे मौसम तंत्र समुद्री नमी को बड़ी मात्रा में उत्तर और मध्य भारत की ओर खींचते हैं तथा व्यापक वर्षा की परिस्थितियां उत्पन्न करते हैं। वर्तमान मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि पूर्वी हिंद महासागर के ऊपर एक उष्णकटिबंधीय मौसम तंत्र विकसित हो सकता है, जो अगले चार से सात दिनों के दौरान बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ेगा। इसके प्रभाव से निम्न दबाव क्षेत्र बनने, मध्य क्षोभमंडल में चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने तथा मानसूनी हवाओं के अधिक सक्रिय होने की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो जुलाई के पहले सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और अच्छी वर्षा का दौर शुरू हो सकता है, जिससे मानसून की आधिकारिक प्रगति भी तेज हो जाएगी।