जबलपुर, भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में आत्म समर्पण करने वाली पाकिस्तानी सेना के शीर्ष कमांडर्स को जबलपुर के कॉलेज ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट की बैरक में कैद रखा गया था । इनमें तत्कालीन लेफ्टीनेंट जनरल एएके नियाजी भी शामिल थे। भारत से रिहा होने वाले वे आखिरी युद्धबंदी थे। जो अप्रेल 1974 यानी की 28 महीने बाद जबलपुर से दिल्ली फिर पाकिस्तान गए।
पाकिस्तान सेना के टॉप कमांडर्स के नाम
इन युद्धबंदियों से जुड़ी स्मृति की पहली बार तस्वीर सामने आई है। जिसमें जनरल नियाजी से लेकर पाकिस्तान सेना के टॉप कमांडर्स के नाम हैं, जो युद्धबंदी रहे और जबलपुर में उन्हें कैद किया गया था। गौरतलब है कि पाकिस्तान सेना ने दिसम्बर 1971 में आत्मसमर्पण किया गया था। सेना के महत्वपूर्ण ठिकाने और ज्यादा सुरक्षित होने के चलते जनवरी 1972 में जबलपुर के सीएमएम को युद्ध बंदी शिविर के रूप में तैयार किया गया था।
कॉलेज ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट के बैरक में रखा
तत्कालीन एओसी स्कूल के छात्र अधिकारियों के आवास में जनरल एएके नियाज़ी सहित पाकिस्तान के तीनों सेनाओं के 15 वरिष्ठ, 15 जनरल रैंकिंग अधिकारियों को युद्धबंदी के रूप में कॉलेज ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट के बैरक में रखा गया था। इसी युद्ध में मध्य भारत एरिया के अंतर्गत ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर और जम्मू और कश्मीर रायफल्स रेजिमेंटल सेंटर के बहादुर सैनिकों ने शौर्य और अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाक सेना के युद्धबंदियों को सितंबर1973 से अप्रेल 1974 तक पाकिस्तान भेजा गया। नियाज़ी 30 अप्रेल 1974 को पाकिस्तान गए।
जनरल नियाजी की किताब में जबलपुर का जिक्र
जबलपुर का जिक्र जनरल नियाजी की पुस्तक द बेट्रायल ऑफ ईस्ट पाकिस्तान में भी हुआ था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि बैचलर सैन्य अधिकारियों के संस्थान का बड़ा हिस्सा उन्हें दिया गया था। जिसमें पाक सेना के तत्कालीन अधिकारियों के रहने और खाने की व्यवस्था थी।
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