नई दिल्ली. देश की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा e-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार कर लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर अब तक सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50,00,92,730 टेलीकंसल्टेशन दर्ज किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा की शुरुआत सरकार के डिजिटल तकनीक का उपयोग कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ किफायती और न्यायसंगत बनाने के प्रयासों का हिस्सा थी। कोविड महामारी के दौरान जब शारीरिक आवाजाही सीमित थी तब इस प्लेटफॉर्म ने विशेष महत्व हासिल किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह उपलब्धि देश की मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पूरक बनाने और दूरी भूगोल तथा पहुंच की बाधाओं को दूर करने में टेलीमेडिसिन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। विशेष रूप से ग्रामीण दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह सेवा महत्वपूर्ण साबित हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टेलीमेडिसिन व्यवस्था के रूप में ई-संजीवनी भारत के डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है। नागरिकों को दूर से स्वास्थ्य पेशेवरों से सलाह लेने की सुविधा देकर यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक स्वास्थ्य सुविधाओं की भौतिक सीमाओं से परे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ा रहा है।
तेजी से हुआ विस्तार
e-संजीवनी सेवा की शुरुआत के बाद से इसमें तेजी और निरंतर विस्तार देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.42 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्पोक 19473 मेडिकल हब और 901 ऑनलाइन ओपीडी का समर्थन करता है। इसमें 241923 पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता जुड़े हुए हैं। 15 भाषाओं में उपलब्ध इस प्लेटफॉर्म पर अंग्रेजी सहित 14 भारतीय भाषाओं का विकल्प है। हर दिन लगभग 2.5 से 3 लाख कंसल्टेशन हो रहे हैं। इसकी एक दिन की सबसे अधिक उपयोगिता 630315 कंसल्टेशन तक पहुंच चुकी है जो देशभर में टेलीमेडिसिन सेवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
जनसंख्या समूहों के लिए प्रासंगिकता
e-संजीवनी के उपयोग पैटर्न से यह भी पता चलता है कि जिन जनसंख्या समूहों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में अधिक यात्रा समय या लॉजिस्टिकल चुनौतियां होती हैं उनके लिए यह सेवा विशेष रूप से प्रासंगिक होती जा रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ सलाह मिल रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने स्वास्थ्य सेवाओं को समुदायों के करीब ला दिया है। मंत्रालय के अनुसार यह उपलब्धि डिजिटल स्वास्थ्य पहल की सफलता को रेखांकित करती है। निरंतर विस्तार से और अधिक लोगों तक सेवा पहुंचने की उम्मीद है।
डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान
e-संजीवनी भारत के डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। कोविड काल में इसकी उपयोगिता साबित होने के बाद अब यह नियमित स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बन गया है। बहुभाषी सुविधा और व्यापक नेटवर्क के कारण यह सेवा देश के हर कोने तक पहुंच रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़ाव ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि टेलीमेडिसिन भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न अंग है। 50 करोड़ कंसल्टेशन का आंकड़ा इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है।