नई दिल्ली. हिमालय ऊपर से जितना शांत दिखाई देता है जमीन के नीचे उतनी ही तेज हलचल है। भारतीय प्लेट हर साल करीब पांच सेंटीमीटर की रफ्तार से तिब्बत की ओर बढ़ रही है। यह प्लेट कई जगह मुड़ रही है और टूट भी रही है। इसी हलचल से धरती के भीतर भारी ऊर्जा जमा हो रही है जिससे हिमालय के कुछ हिस्सों में भूकंपीय खतरा बढ़ता जाएगा। भू-वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण माप भूकंप और उपग्रह के आंकड़ों से पता लगाया है कि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराते हुए तिब्बत के नीचे करीब 100 किमी की गहराई तक पहुंच रही है। यह प्लेट मुड़ने और टूटने से असमान संरचना बन रही है।
सतह के नीचे छिपी प्रक्रिया
सतह पर दिखाई न देने वाली यह प्रक्रिया लंबे समय में चट्टानों पर दबाव बढ़ा सकती है। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान का यह शोध जियोफिजिक्स फॉर एडवांसिंग सीस्मोलॉजी में प्रकाशित हुआ। भारतीय और यूरेशियन प्लेट की टक्कर जारी है और इससे हिमालय क्षेत्र में तनाव जमा हो रहा है। प्लेट की गति और मुड़ने की प्रक्रिया भूकंप के खतरे को प्रभावित करती है। वैज्ञानिक लगातार इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। लंबे समय में यह हलचल बड़े भूकंप का कारण बन सकती है।
गंगा मैदान के नीचे पुरानी शृंखलाएं
इस शोध में गंगा के मैदान के नीचे दबी पुरानी पर्वत शृंखलाओं की भी पहचान की गई है। इनमें दिल्ली-हरिद्वार फैजाबाद और मुंगेर-सहरसा जैसी संरचनाएं शामिल हैं। ये संरचनाएं हिमालय की ओर फैली हुई हैं और धरती के भीतर पड़ने वाले तनाव को अलग-अलग हिस्सों में केंद्रित कर सकती हैं। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में भूकंप के खतरे का स्वरूप भी प्रभावित हो सकता है। दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों में इन संरचनाओं का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुरानी पर्वत शृंखलाएं तनाव वितरण को बदल रही हैं।
भूपर्पटी की अलग-अलग मोटाई
भारतीय और यूरेशियन प्लेट की इस टक्कर का असर हिमालय और तिब्बती पठार की भूपर्पटी पर भी दिखाई देता है। उत्तरी भारत में भूपर्पटी की मोटाई करीब 35 किमी और तिब्बत के नीचे यह करीब 70 किमी तक है। हिमालय में अधिकांश भूकंप 10 से 15 किमी की उथली गहराई में आते हैं। भूपर्पटी की मोटाई में अंतर तनाव के जमाव को प्रभावित करता है। उथली गहराई वाले भूकंप अधिक विनाशकारी हो सकते हैं। वैज्ञानिक इन आंकड़ों के आधार पर जोखिम क्षेत्रों की पहचान कर रहे हैं।
भूकंपीय खतरे की चेतावनी
शोध के अनुसार हिमालय क्षेत्र में भूकंपीय खतरा लगातार बना हुआ है। भारतीय प्लेट की निरंतर गति ऊर्जा जमा कर रही है जो भविष्य में बड़े भूकंप का रूप ले सकती है। दिल्ली-हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में भी जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है। राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के अध्ययन ने इन प्रक्रियाओं को और स्पष्ट किया है। सतर्कता और भवन सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूकंप तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।