नई दिल्ली. भारत के रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान ‘एसयू-30 एमकेआई’ के लिए विकसित स्वदेशी ऑप्टिकल मॉड्यूल आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह प्रणाली विमान की निगरानी, लक्ष्य पहचान, टोही और सटीक आक्रमण क्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। विशेष रूप से ऐसे समय में, जब आधुनिक युद्ध तकनीकी श्रेष्ठता और वास्तविक समय की सूचनाओं पर आधारित होते जा रहे हैं, यह स्वदेशी प्रणाली भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करने वाली साबित हो सकती है। इसके साथ ही विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अत्याधुनिक ऑप्टिकल मॉड्यूल से मिलेगी वास्तविक समय की सटीक जानकारी
सीएसआईआर–केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन द्वारा विकसित यह ऑप्टिकल मॉड्यूल आधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तथा इंफ्रारेड इमेजिंग तकनीकों से सुसज्जित है। इसके साथ लेजर रेंज फाइंडर और लेजर डिजाइनेटर जैसी उन्नत प्रणालियों का एकीकरण किया गया है, जिससे पायलट को वास्तविक समय में लक्ष्य की स्थिति, दूरी और आसपास के सामरिक वातावरण की सटीक जानकारी प्राप्त होती है। आधुनिक हवाई अभियानों में निर्णय लेने की गति और सटीकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह प्रणाली पायलटों को लक्ष्य की पहचान, उसका निरंतर पीछा करने तथा उपयुक्त समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक मिशन की सफलता की संभावना को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है।
दिन-रात और प्रतिकूल मौसम में भी प्रभावी रहेगा संचालन
आधुनिक युद्ध केवल अनुकूल परिस्थितियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि अनेक बार कम दृश्यता, धुंध, वर्षा अथवा रात्रिकालीन परिस्थितियों में भी अभियान संचालित करने पड़ते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस स्वदेशी मॉड्यूल को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह दिन और रात दोनों समय समान दक्षता से कार्य कर सके। इंफ्रारेड इमेजिंग क्षमता के कारण कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में भी लक्ष्य की पहचान संभव हो सकेगी। इससे भारतीय वायुसेना की चौबीसों घंटे परिचालन क्षमता और अधिक मजबूत होगी तथा किसी भी मौसम में सामरिक अभियान संचालित करने की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
लंबी दूरी से लक्ष्य की पहचान और सतत निगरानी की क्षमता
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी लंबी दूरी तक लक्ष्य का पता लगाने, उसकी स्पष्ट पहचान करने और लगातार उस पर नजर बनाए रखने की क्षमता शामिल है। आधुनिक हवाई अभियानों में लक्ष्य की प्रारंभिक पहचान जितनी शीघ्र होती है, मिशन की सफलता की संभावना उतनी ही अधिक होती है। यह मॉड्यूल पायलट को दूर स्थित संभावित लक्ष्यों के बारे में समय रहते जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे सामरिक निर्णय अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से लिए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त टोही अभियानों तथा सीमा क्षेत्रों में निगरानी के दौरान भी यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और वायुसेना की खुफिया क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करेगी।
लेजर तकनीक से बढ़ेगी सटीक प्रहार की क्षमता
इस ऑप्टिकल मॉड्यूल में एकीकृत लेजर रेंज फाइंडर और लेजर डिजाइनेटर आधुनिक सटीक आक्रमण प्रणाली के महत्वपूर्ण घटक हैं। लेजर रेंज फाइंडर लक्ष्य की सटीक दूरी का निर्धारण करता है, जबकि लेजर डिजाइनेटर लक्ष्य को इस प्रकार चिह्नित करता है कि लेजर-निर्देशित आयुध अत्यधिक सटीकता के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंच सकें। आधुनिक युद्ध में न्यूनतम संसाधनों के साथ अधिकतम प्रभाव प्राप्त करना रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में यह प्रणाली न केवल प्रहार की सटीकता बढ़ाएगी, बल्कि अनावश्यक क्षति को भी सीमित करने में सहायक सिद्ध होगी। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय वायुसेना की ‘प्रिसिजन स्ट्राइक’ क्षमता में महत्वपूर्ण गुणात्मक वृद्धि के रूप में देख रहे हैं।
तीव्र गति और कठिन युद्धाभ्यास के दौरान भी बनी रहेगी सटीकता
लड़ाकू विमान अत्यधिक गति और तीव्र मोड़ों के साथ जटिल युद्धाभ्यास करते हैं, जिनके दौरान सेंसरों की स्थिरता बनाए रखना तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। इस स्वदेशी प्रणाली में प्रयुक्त जायरो-स्थिरित मंच इस चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से विमान के तीव्र मोड़ लेने अथवा उच्च गुरुत्वीय बल वाली परिस्थितियों में भी सेंसर स्थिर बने रहते हैं और लक्ष्य पर निरंतर निगरानी बनाए रखते हैं। इससे पायलट को बदलती परिस्थितियों में भी सटीक सूचनाएं मिलती रहती हैं और लक्ष्य पर प्रभावी नियंत्रण बना रहता है। यह विशेषता युद्ध अभियानों में सफलता की संभावना को और अधिक मजबूत बनाती है।
आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि
स्वदेशी ऑप्टिकल मॉड्यूल का विकास केवल एक नई तकनीक का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि भी है। लंबे समय तक अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बाद अब देश अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत प्रणालियां विकसित कर रहा है। इससे रक्षा उत्पादन में स्वदेशी उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञता का विस्तार होगा और विदेशी आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की स्वदेशी तकनीकों का विकास भविष्य में भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।