जम्मू-कश्मीर में मानसून सीजन से पहले प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। पिछले साल आई बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से मिले अनुभवों को देखते हुए मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों और एजेंसियों को पहले से एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-धन के नुकसान को कम किया जा सके।
संवेदनशील इलाकों की होगी पहचान, तैयार होगी विशेष रणनीति
बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, एसडीआरएफ, पुलिस, बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग और सभी जिलों के उपायुक्तों ने हिस्सा लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए व्यापक तैयारी जरूरी है। उन्होंने जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर उनके लिए अलग से शमन रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराने पर भी जोर दिया।
सड़कों और बिजली व्यवस्था को लेकर दिए विशेष निर्देश
मुख्य सचिव ने बीआरओ, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी समेत सड़क निर्माण एजेंसियों को आपदा की स्थिति में संपर्क मार्गों को जल्द बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों के लिए निर्बाध संपर्क व्यवस्था बेहद जरूरी है। बिजली विकास विभाग को भी अपने बुनियादी ढांचे का जोखिम मूल्यांकन करने और खराब मौसम के दौरान बिजली सेवाएं सुचारू रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
जिलों को उपलब्ध कराई गई धनराशि, सैटेलाइट फोन भी मिलेंगे
आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव चंद्राकर भारती ने बताया कि पिछले कई महीनों से तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन संसाधनों की खरीद के लिए जिलों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। सरकारी भवनों का फायर सेफ्टी ऑडिट जारी है, जबकि संवेदनशील तहसीलों और उपमंडल अधिकारियों को सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और SDRF को किया जा रहा मजबूत
एसडीआरएफ कमांडेंट इम्तियाज हुसैन मीर ने जिला स्तर पर बचाव दलों को आधुनिक उपकरणों से लैस करने की जरूरत बताई। वहीं जम्मू के डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष, आपातकालीन रिपोर्टिंग प्रणाली और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की जानकारी दी। कश्मीर डिविजन के कमिश्नर अंशुल गर्ग ने बताया कि संवेदनशील गांवों, राहत केंद्रों और बचाव व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है।
अमरनाथ यात्रा के लिए भी विशेष इंतजाम
प्रशासन ने आगामी अमरनाथ यात्रा को देखते हुए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए भी विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रीनगर स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के साथ पर्वतीय बचाव दलों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा बडगाम के ओम्पोरा में बन रहे इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जुलाई के अंत तक इसे विभाग को सौंपे जाने की संभावना है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को मानसून के दौरान लगातार सतर्क रहने और आपसी समन्वय के साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं।