तिरुवनंतपुरम. दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्र सक्रियता के बीच केरल एक बार फिर भीषण बाढ़ और भूस्खलन की मार झेल रहा है। लगातार कई दिनों से हो रही भारी वर्षा के कारण राज्य के अनेक जिलों में नदियां उफान पर हैं, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राज्य सरकार के अनुसार वर्षा से जुड़ी विभिन्न दुर्घटनाओं में अब तक 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक निगरानी बढ़ाते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षित निकासी, राहत शिविरों का संचालन और आवश्यक सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने राहत उपायों की समीक्षा की, प्रभावित परिवारों के लिए सहायता की घोषणा
राज्य सरकार ने आपदा की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला प्रशासन और संबंधित मंत्रियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने वर्षा से प्रभावित परिवारों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा करते हुए कृषि विभाग को भी निर्देश दिया कि फसल और कृषि भूमि को हुए नुकसान के मुआवजे की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर संशोधित प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। सरकार का कहना है कि अंतिम सर्वेक्षण पूरा होने के बाद प्रभावित किसानों और अन्य पीड़ित परिवारों को व्यापक राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाएगा।
कोट्टायम से मलप्पुरम तक कई जिलों में जनहानि, राहत शिविरों में हजारों लोग
राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षा और उससे जुड़ी दुर्घटनाओं के कारण जनहानि दर्ज की गई है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में कोट्टायम, मलप्पुरम, एर्नाकुलम, कोल्लम, कन्नूर, कोझिकोड, इडुक्की तथा मुवत्तुपुझा शामिल हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन, जलभराव और डूबने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन के अनुसार अनेक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राज्यभर में सैकड़ों राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां हजारों विस्थापित लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राहत शिविरों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान, हजारों किसान प्रभावित
लगातार हो रही वर्षा का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे हजारों किसान प्रभावित हुए हैं। धान, रबर, मसाले, नारियल और बागवानी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। राज्य सरकार ने कृषि विभाग को विस्तृत सर्वेक्षण कर वास्तविक क्षति का आकलन करने तथा किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित परिवारों की आजीविका पर पड़े संकट को कम किया जा सके।
एनडीआरएफ, सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती से बचाव अभियान तेज
राज्य के संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। पथानामथिट्टा और कोट्टायम जैसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ की कई टीमें लगातार बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त टीमें भी तैयार रखी गई हैं। प्रशासन ने हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है ताकि दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक शीघ्र पहुंचा जा सके। इसके साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस तथा रक्षा सुरक्षा कोर के जवानों को भी आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न जिलों में तैनात करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग और स्वयंसेवी संगठन भी राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
मौसम विभाग का नया अलर्ट, मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह
भारतीय मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी राज्य के अनेक हिस्सों में अत्यधिक वर्षा, तेज हवाओं और प्रतिकूल मौसम की संभावना व्यक्त करते हुए नया अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कई क्षेत्रों में तेज गति से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन और अधिक प्रभावित होने की आशंका है। इसी के मद्देनजर मछुआरों को केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप तट के समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है। समुद्री परिस्थितियों के बिगड़ने और ऊंची लहरें उठने की चेतावनी भी जारी की गई है। समुद्री विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ संस्थानों ने उत्तरी केरल तट पर असामान्य ऊंचाई की लहरों की संभावना जताई है, जिससे तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा प्रबंधन की बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में केरल में अत्यधिक वर्षा, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ी है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण, पहाड़ी क्षेत्रों में अतिक्रमण तथा प्राकृतिक जल निकासी तंत्र पर बढ़ते दबाव को प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। ऐसे में केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक भूमि उपयोग नीति और संवेदनशील क्षेत्रों में सतत विकास की रणनीति अपनाना भी आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने से भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें
राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें तथा अनावश्यक रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। प्रशासन ने लोगों से सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का आग्रह किया है। राहत एजेंसियां चौबीसों घंटे सक्रिय हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि सभी जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।