कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के लेकटाउन इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहां लगी अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की 70 फीट ऊंची विशालकाय मूर्ति (Statue) तेज हवाओं के कारण हवा में डोल रही है। स्थानीय निवासियों की शिकायत के बाद हरकत में आए लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों, सरकारी अधिकारियों और लेकटाउन थाने की पुलिस ने मौके का मुआयना किया। किसी बड़े हादसे या मूर्ति के गिरने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इसे तुरंत हटाने का फैसला किया है। अनुमान है कि सोमवार रात को ही इस 70 फीट ऊंचे स्टैच्यू को तोड़कर हटा दिया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि इस मूर्ति के ढहने की खबरों के बीच, इसे तैयार करवाने वाले राज्य के पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बसु पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार को लेकर एक और बड़ा कानूनी शिकंजा कस दिया है।
खुद मेसी ने वर्चुअली किया था उद्घाटन
इस भव्य मूर्ति का निर्माण पिछले साल दिसंबर में दमन और दीव के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री सुजीत बसु की देखरेख में किया गया था। प्रसिद्ध मूर्तिकार मोंटी पाल के नेतृत्व में इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार किया गया था। जब अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी कोलकाता के दौरे पर वर्चुअली जुड़े थे, तब उन्होंने खुद इस 70 फीट ऊंची मूर्ति का उद्घाटन किया था। यह मूर्ति फुटबॉल प्रेमियों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र थी, लेकिन अब सुरक्षा कारणों से इसे तोड़ा जा रहा है।
ED का बड़ा दावा: नगर पालिका भर्ती घोटाले के 'मास्टरमाइंड' थे सुजीत बसु
दूसरी तरफ, केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) ने सुजीत बसु को लेकर अदालत में बेहद चौंकाने वाले दस्तावेज पेश किए हैं। ईडी का दावा है कि दक्षिण दमदम नगर पालिका भर्ती घोटाले के मुख्य सूत्रधार (Mastermind) सुजीत बसु ही हैं। वर्ष 2009 से 2021 तक सुजीत बसु दक्षिण दमदम नगर पालिका के वाइस चेयरमैन थे और इसी दौरान उन्होंने 'काउंसिलर कोटा' का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया।
क्या था 'काउंसिलर कोटा'?
जांच में सामने आया है कि इस अवैध कोटे के तहत प्रत्येक काउंसिलर को 2 और चेयरमैन इन-काउंसिल के सदस्यों को 5 अयोग्य उम्मीदवारों के नाम नौकरी के लिए सिफारिश करने की छूट थी। इन नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
अयान शील के डिजिटल डेटा से खुला राज, सिर्फ कागजों पर मिलती थी सैलरी
ईडी ने बताया कि इस घोटाले के एक अन्य मुख्य आरोपी अयान शील के घर से जब्त किए गए डिजिटल सबूतों और एक्सेल शीट से सुजीत बसु के कारनामों का खुलासा हुआ है। इस डेटा में 40 उम्मीदवारों के नाम के आगे 'रिकमेंडिंग अथॉरिटी' (सिफारिशकर्ता) के रूप में सीधे सुजीत बसु का नाम लिखा मिला है। जांचकर्ताओं के अनुसार, सुजीत बसु ने अकेले दक्षिण दमदम नगर पालिका में करीब 150 लोगों की अवैध नौकरी की सिफारिश की थी।
इतना ही नहीं, सुजीत बसु ने अपने पूर्व 'एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट' (जो 2022 तक उनके साथ थे) को दोहरा फायदा पहुंचाया। सुजीत की सिफारिश पर उस अधिकारी की पत्नी को कमारहाटी नगर पालिका में क्लर्क और भाई को दक्षिण दमदम नगर पालिका में चपरासी (Peon) की अवैध नौकरी मिली। केंद्रीय एजेंसियों को अंदेशा है कि इस कोटे के तहत नौकरी पाने वाले कई लोग सिर्फ कागजों पर ही काम करते थे और दफ्तर जाए बिना हर महीने पूरी सैलरी उठा रहे थे। ईडी अब इन सभी कर्मचारियों के सर्विस बुक की जांच कर रही है और जल्द ही इन्हें पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
एक तरफ जहां सुजीत बसु की बनाई 'मेसी की साख' (मूर्ति) हवा में डोलकर टूटने की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के दलदल में उनका खुद का राजनीतिक करियर भी जमींदोज होता नजर आ रहा है।