नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित भुगतान विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया। लंबे समय से लंबित वित्तीय दायित्वों को एकमुश्त व्यवस्था के माध्यम से निपटाने पर सहमति बनी है, जिससे अंतरराज्यीय समन्वय को नई मजबूती मिलने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के प्रावधानों के अनुरूप हुआ समाधान
सरकारी जानकारी के अनुसार यह समझौता नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय के तहत निर्धारित लागत साझेदारी और भुगतान दायित्वों से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए किया गया है। वर्षों से विभिन्न राज्यों के बीच परियोजना व्यय के बंटवारे को लेकर वित्तीय देनदारियां लंबित थीं, जिन्हें अब आपसी सहमति से समाप्त करने का रास्ता निकाला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भविष्य में परियोजना प्रबंधन अधिक पारदर्शी और समन्वित होगा तथा राज्यों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
सहकारी संघवाद की भावना को मिली नई मजबूती
समझौते के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्षों से लंबित यह विषय सभी लाभार्थी राज्यों के बीच आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से सुलझाया गया है। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि जब केंद्र और राज्य मिलकर समस्याओं का समाधान करते हैं तो राष्ट्रीय विकास को नई गति मिलती है। उनका कहना था कि जल संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राजनीतिक मतभेदों के बजाय सहयोग की भावना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि अंततः इसका लाभ देश के नागरिकों और किसानों को ही प्राप्त होता है।
सरदार सरोवर परियोजना ने बदली कई राज्यों की तस्वीर
सरदार सरोवर परियोजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय नदी परियोजनाओं में गिना जाता है। इस परियोजना से गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है, पेयजल उपलब्धता बढ़ी है तथा विद्युत उत्पादन को भी मजबूती मिली है। विशेष रूप से राजस्थान के उन इलाकों में, जहां नर्मदा का जल पहुंचा है, कृषि उत्पादन, भूमि की उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग ने लाखों किसानों के जीवन और कृषि व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
जल विवादों के समाधान के लिए संवाद आधारित मॉडल को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने इस समझौते को भविष्य के लिए एक सकारात्मक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है। अमित शाह ने राजस्थान और हरियाणा के बीच जल विवाद के समाधान तथा किशाऊ बांध परियोजना में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जल संबंधी विवादों का स्थायी समाधान केवल संवाद, विश्वास और सहयोग से ही संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और बढ़ती जल मांग के बीच राज्यों के बीच इस प्रकार की सहमति देश की जल सुरक्षा, कृषि विकास और सतत संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। यह समझौता न केवल लंबित वित्तीय विवाद समाप्त करेगा, बल्कि भविष्य में अंतरराज्यीय परियोजनाओं के बेहतर संचालन का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।