केंद्र सरकार ने दवाओं के विकास और क्लिनिकल रिसर्च की प्रक्रिया को तेज करने के लिए न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स (NDCT) नियम, 2019 में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इन बदलावों से दवा विकास की समय-सीमा घटेगी और देश में फार्मास्युटिकल नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा
मंत्रालय ने बताया कि संशोधनों का उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुमोदन में लगने वाला समय कम करना और फार्मा सेक्टर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करना है। इससे दवा शोध, परीक्षण और मंजूरी की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम होगी, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। संशोधित नियमों के तहत दवा विकास चक्र में कम से कम 90 दिनों की बचत होने की संभावना है। जिन श्रेणियों में अभी भी टेस्ट लाइसेंस की आवश्यकता थी, वहां अनुमोदन अवधि को 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।
उच्च जोखिम वाली दवाओं के लिए यह छूट लागू नहीं होगी
पहले फार्मा कंपनियों को शोध, परीक्षण या विश्लेषण के लिए दवाओं की सीमित मात्रा बनाने के लिए CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) से टेस्ट लाइसेंस लेना पड़ता था। नए नियमों के तहत यह लाइसेंस प्रक्रिया समाप्त कर केवल ऑनलाइन पूर्व-सूचना (Intimation) पर्याप्त होगी। हालांकि, साइटोटॉक्सिक, नारकोटिक और साइकोट्रॉपिक जैसी उच्च जोखिम वाली दवाओं के लिए यह छूट लागू नहीं होगी।
जेनेरिक दवा उद्योग को तेजी मिलेगी
मंत्रालय ने बताया कि CDSCO हर साल लगभग 30,000–35,000 टेस्ट लाइसेंस आवेदन संसाधित करता है। नए नियमों से नियामकीय बोझ काफी कम होगा और उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, कम जोखिम वाले बायोएवैलेबिलिटी और बायोइक्विवेलेंस (BA/BE) अध्ययन के लिए अब पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे अध्ययन केवल ऑनलाइन सूचना देने के बाद शुरू किए जा सकेंगे, जिससे खासकर जेनेरिक दवा उद्योग को तेजी मिलेगी। CDSCO हर साल करीब 4,000–4,500 BA/BE आवेदनों को संभालता है और यह बदलाव प्रक्रियागत देरी को काफी कम करेगा।
ऑनलाइन मॉड्यूल भी उपलब्ध कराए जाएंगे
इन सुधारों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और सुगम पोर्टल पर विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उद्योग को पारदर्शी और आसान डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म मिलेगा। मंत्रालय ने कहा कि ये सुधार जन विश्वास सिद्धांत और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत सरकार की भरोसे-आधारित नियामकीय प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। साथ ही, इससे फार्मा क्षेत्र में R&D को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक दवा अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में और मजबूत होगा।
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