नई दिल्ली। नीट-यूजी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना हमला और तेज कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना होगा। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी 17 जून से राजस्थान के कोटा शहर से देशव्यापी छात्र अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं।
टेलीग्राम बैन नहीं, शिक्षा मंत्री को हटाइए: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उन लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। खरगे ने कहा कि सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाना चाहिए, क्योंकि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है, जबकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा जब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
पेपर लीक माफिया को बचाने का लगाया आरोप
खरगे ने केंद्र सरकार पर पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे स्तर के लोगों को पकड़कर बड़ी मछलियों को बचाने का काम कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में करीब 90 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। युवाओं की मेहनत और वर्षों की तैयारी एक झटके में बर्बाद हो जाती है, लेकिन सरकार अब तक कोई स्थायी समाधान पेश नहीं कर पाई है।
युवाओं का भविष्य खतरे में, सरकार मौन: कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। खरगे ने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कर्ज तक लेते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने या पेपर लीक होने से उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाओं से युवाओं में निराशा और तनाव बढ़ा है। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पार्टी ने सरकार से परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
यूपीएससी और सीबीएसई को लेकर भी उठे सवाल
खरगे ने कहा कि अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि प्रतिष्ठित परीक्षाओं और संस्थाओं की साख भी प्रभावित होने लगी है। उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई के परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आए हैं, जबकि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि समय रहते व्यापक सुधार नहीं किए गए तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है। पार्टी ने परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की है।
राहुल गांधी आज से शुरू करेंगे छात्र अभियान
पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में है। राहुल गांधी 17 जून से राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘स्टूडेंट्स इको’ कार्यक्रम से छात्र सम्मेलनों की शुरुआत करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान छात्रों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए शुरू किया जा रहा है। कोटा के बाद इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य युवाओं को एकजुट कर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को मजबूत करना है।
शिक्षा व्यवस्था पर सियासत हुई तेज
नीट-यूजी, सीबीएसई मूल्यांकन विवाद और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। कांग्रेस जहां इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में राहुल गांधी के छात्र अभियान और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने की संभावना है। छात्रों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।