डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने भारत की सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल ‘भाषिणी फॉर सेवा/संचालन – ए भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम’ के तहत शुरू की गई है।
22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी सेवाएं
इस साझेदारी के तहत GeM प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी पहुंच, प्रशासन और सेवा वितरण को मजबूत किया जाएगा, ताकि उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा भाषा में सरकारी खरीद से जुड़ी जानकारी और सेवाओं का लाभ उठा सकें। पहल के तहत 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं सहित अन्य भारतीय भाषाओं में संवाद को आसान बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
वॉयस-फर्स्ट और जनरेटिव एआई तकनीक पर रहेगा फोकस
डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन की इकाई भाषिणी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत संचालित GeM मिलकर वॉयस-फर्स्ट तकनीक तथा जनरेटिव एआई आधारित समाधान विकसित करेंगे। इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी भाषा में वॉयस आधारित सहायता और सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
बहुभाषी एआई मॉडल और वॉयस बॉट होंगे तैयार
एमओयू के तहत भाषिणी उद्यात, मित्र, ऐपमित्र, सहयोगी और प्रवक्ता जैसी पहलों के माध्यम से बहुभाषी डिजिटल संसाधनों का विकास किया जाएगा। इसमें ट्रांसलेशन एपीआई इंटीग्रेशन, क्षेत्र-विशिष्ट भाषा मॉडल, बहुभाषी शब्दावली निर्माण, वॉयस बॉट, रेफरेंस एप्लिकेशन और भाषाई डेटा सेट तैयार करने जैसे कार्य शामिल होंगे।
MSME और स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का मानना है कि भाषा किसी भी व्यवसाय या उद्यमी के लिए सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में भागीदारी की बाधा नहीं बननी चाहिए। इस पहल से विशेष रूप से MSME, स्टार्टअप, उद्यमी और विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में कार्यरत व्यवसायों को फायदा मिलेगा। विक्रेताओं के पंजीकरण, प्लेटफॉर्म नेविगेशन और संचार संबंधी प्रक्रियाएं पहले से अधिक आसान होंगी।
भाषादान कार्यक्रम से बढ़ेगा भाषा डेटा संग्रह
साझेदारी के तहत भाषादान कार्यक्रम को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके माध्यम से भाषा डेटा संग्रह, जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और बहुभाषी एआई टूल्स के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे भारत की भाषा तकनीक पारिस्थितिकी को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया ऐतिहासिक कदम
GeM के एसीईओ एवं मुख्य विक्रेता अधिकारी अजित बी. चव्हाण ने कहा कि यह सहयोग सार्वजनिक खरीद प्रणाली में भाषाई बाधाओं को दूर करेगा और GeM को देशभर के खरीदारों और विक्रेताओं के लिए अधिक सुलभ बनाएगा।
वहीं, डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि भाषिणी का उद्देश्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वास्तव में समावेशी बनाना है। GeM के साथ यह साझेदारी सरकारी खरीद तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भाषा किसी भी नागरिक या उद्यम के लिए अवसरों में बाधा न बने।
800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन दे रहा भाषिणी
वर्तमान में भाषिणी प्लेटफॉर्म 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन प्रदान कर रहा है। यह प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक एआई आधारित अनुरोधों को संसाधित करता है और 36 भारतीय पाठ्य भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं तथा 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। यह नई पहल भारत के डिजिटल समावेशन और बहुभाषी डिजिटल अर्थव्यवस्था के विजन को और मजबूत करेगी।