केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस महीने अपने प्रस्तावित अमेरिका दौरे को टाल सकती हैं। इसकी मुख्य वजह 16 से 18 अप्रैल के बीच आयोजित होने वाला संसद सत्र है, जिसमें महिला आरक्षण को तेजी से लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं। सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए विधायी प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाना चाहती है।
महिला आरक्षण और परिसीमन आयोग पर जोर
सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयकों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ एक नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान शामिल है। इन विधेयकों को हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में वित्त मंत्री की संसद में उपस्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी प्रभावित
निर्मला सीतारमण का अमेरिका दौरा कई अहम बैठकों के लिए प्रस्तावित था, जिसमें विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वसंतकालीन बैठकें शामिल थीं। इसके अलावा न्यूयॉर्क में प्रमुख उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रमुखों के साथ उनकी बैठकें भी निर्धारित थीं। हालांकि संसद सत्र के चलते इन कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और तनाव का प्रभाव
यह बैठकें ऐसे समय आयोजित हो रही हैं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हुई हैं, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
वैश्विक व्यापार और मुद्रास्फीति पर असर
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संस्था के अनुसार, वैश्विक व्यापार वृद्धि दर में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। जहां 2025 में यह दर लगभग 4.7 प्रतिशत थी, वहीं 2026 में इसके 1.5 से 2.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। बढ़ती महंगाई, विदेशी निवेशकों की वापसी और मुद्रा विनिमय दरों में गिरावट विकासशील देशों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
वैश्विक संकटों पर वित्त मंत्री की टिप्पणी
निर्मला सीतारमण ने हाल ही में अमेरिका-ईरान संघर्ष को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए “प्रणालीगत झटका” बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे घटनाक्रमों ने पहले ही वैश्विक आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है, जिससे ऋण स्तर बढ़ा है और विकास की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं।
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मिली वरीयता
वर्तमान परिदृश्य में यह स्पष्ट है कि सरकार घरेलू नीतिगत मुद्दों, विशेषकर महिला सशक्तिकरण से जुड़े विधेयकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में वित्त मंत्री का संभावित दौरा रद्द होना इस बात का संकेत है कि सरकार संसद के माध्यम से महत्वपूर्ण सुधारों को शीघ्र लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।