नई दिल्ली- स्वतंत्रता दिवस की आधी रात केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को ₹3.50 से घटाकर शून्य कर दिया है, जबकि डीजल पर यह शुल्क ₹25.50 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर किया गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी टैक्स ₹22 से घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, इस फैसले का घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
पेट्रोल पर पूरी तरह खत्म हुआ विंडफॉल टैक्स
सरकार के नए आदेश के मुताबिक पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ₹3.50 प्रति लीटर की ड्यूटी अब पूरी तरह खत्म कर दी गई है। वहीं डीजल पर शुल्क में ₹1.50 प्रति लीटर की कटौती की गई है। अब डीजल के एक्सपोर्ट पर ₹24 प्रति लीटर शुल्क लागू होगा।
ATF एक्सपोर्ट पर भी टैक्स घटा
एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर भी सरकार ने राहत दी है। पहले ATF पर ₹22 प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लग रही थी, जिसे अब घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी एविएशन फ्यूल पर ₹2.50 प्रति लीटर की कमी की गई है।
कच्चे तेल की कीमतों के बीच लिया गया फैसला
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते ग्लोबल क्रूड सप्लाई को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को देखते हुए एक्सपोर्ट लेवी की समय-समय पर समीक्षा करती है।
2022 में पहली बार लगाया गया था विंडफॉल टैक्स
भारत में विंडफॉल टैक्स जुलाई 2022 में पहली बार लागू किया गया था। इसका उद्देश्य कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को होने वाले असाधारण मुनाफे पर अतिरिक्त टैक्स लगाना था। बाद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में परिस्थितियां बदलने के साथ इसमें कई बार बदलाव किए गए।
क्या आम लोगों को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा?
विंडफॉल टैक्स में कटौती का मतलब यह नहीं है कि देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। यह टैक्स मुख्य रूप से तेल कंपनियों के एक्सपोर्ट और अतिरिक्त मुनाफे से जुड़ा होता है। इसलिए इसका घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ता।
सरकार क्यों करती है विंडफॉल टैक्स की समीक्षा?
विंडफॉल टैक्स को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट से जुड़े मार्जिन के आधार पर समय-समय पर बदला जाता है। जब कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों से असाधारण मुनाफा मिलता है, तो सरकार अतिरिक्त टैक्स लगा सकती है। वहीं परिस्थितियां बदलने पर इस शुल्क में कटौती भी की जाती है।