भारतीय रेलवे ने बिजली प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने पूरे रेलवे नेटवर्क में स्मार्ट और प्रीपेड मीटर आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब रेलवे कर्मचारियों के आवासों (स्टाफ क्वार्टरों) में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जिससे बिजली खपत की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। रेलवे बोर्ड की निदेशक (विद्युत अभियांत्रिकी) निशा मनोहर पाटिल द्वारा 19 जून को जारी आदेश में वर्ष 2020 की पुरानी नीति को निरस्त कर दिया गया है। अब रेलवे आवासों के साथ-साथ वेंडरों, निजी ठेकेदारों के कार्यालयों, रेस्तरां, यूनियन कार्यालयों और उन सभी परिसरों में स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे, जहां बिजली उपयोग का शुल्क रेलवे द्वारा वसूला जाता है।
पहली बार कर्मचारियों के क्वार्टर भी दायरे में
अब तक रेलवे की स्मार्ट मीटर नीति मुख्य रूप से वेंडरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक सीमित थी, जबकि कर्मचारियों के आवास इससे बाहर थे। नई नीति में पहली बार रेलवे स्टाफ क्वार्टरों को भी शामिल किया गया है।
रेलवे का कहना है कि इस बदलाव से:
मैनुअल मीटर रीडिंग की आवश्यकता समाप्त होगी।
बिजली चोरी और अनियमितताओं पर नियंत्रण लगेगा।
खपत का रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा।
केंद्रीकृत ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली विकसित होगी।
बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, जोनल रेलवे अपनी आवश्यकता के अनुसार इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकेंगी। रेलवे आवासों और अन्य परिसरों में स्मार्ट अथवा प्रीपेड मीटर लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक स्वीकृति दी जा सकती है।
कर्मचारी संगठनों ने जताया विरोध
रेलवे बोर्ड के इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) ने इसे कर्मचारी विरोधी निर्णय बताया है। यूनियन के महामंत्री बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि जब कई राज्य सरकारें प्रीपेड मीटर हटाकर पोस्टपेड व्यवस्था की ओर बढ़ रही हैं, तब रेलवे कर्मचारियों पर प्रीपेड मीटर लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यूनियन इस मुद्दे को ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) और रेल मंत्रालय के सामने उठाएगी।
बिहार के रेलकर्मियों के लिए भी उठी मांग
यूनियन ने बिहार में कार्यरत रेलवे कर्मचारियों को राज्य सरकार की तरह 125 यूनिट मुफ्त बिजली सुविधा देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि राज्य के आम उपभोक्ताओं को यह लाभ मिल रहा है, जबकि रेलवे कर्मचारी इससे वंचित हैं।
कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रेलवे कर्मचारियों को अपनी बिजली खपत पर अधिक निगरानी रखनी होगी। यदि प्रीपेड मॉडल लागू होता है, तो उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज कराना पड़ सकता है। वहीं स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली उपयोग का सटीक रिकॉर्ड रेलवे प्रशासन के पास उपलब्ध रहेगा।