नई दिल्ली. देश में महंगाई और उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित विशेष बचत योजना की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य परिवारों को लंबे समय तक नियमित बचत के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि भविष्य में विद्यालय, महाविद्यालय और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े बढ़ते खर्चों का बोझ कुछ हद तक कम किया जा सके। यदि यह योजना लागू होती है तो शिक्षा के उद्देश्य से खोले गए खातों पर सामान्य बचत खातों की तुलना में अधिक ब्याज उपलब्ध कराया जा सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की लक्षित बचत योजनाएं परिवारों में दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन को भी बढ़ावा देती हैं।
बैंकों से मांगे गए सुझाव, उद्योग स्तर पर शुरू हुआ विचार-विमर्श
सूत्रों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने इस प्रस्ताव पर बैंकिंग क्षेत्र से विस्तृत सुझाव और व्यावहारिक राय मांगी है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक इस प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं तथा आपसी विमर्श के बाद अपनी सिफारिशें केंद्रीय बैंक को सौंपेंगे। बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि किसी भी नई बचत योजना को सफल बनाने के लिए उसकी संरचना, पात्रता, ब्याज दर, अवधि और संचालन संबंधी नियमों का स्पष्ट एवं व्यावहारिक होना आवश्यक है। इसलिए वर्तमान चरण में विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नियामकीय बदलाव के बिना संभव नहीं होगी विशेष ब्याज दर
बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि शिक्षा आधारित विशेष बचत उत्पाद लागू किया जाता है तो इसके लिए मौजूदा नियामकीय ढांचे में आवश्यक संशोधन करने होंगे। वर्तमान व्यवस्था में सामान्य बचत खातों से अलग किसी विशेष उद्देश्य वाले खाते पर अतिरिक्त ब्याज देने के लिए स्पष्ट नियामकीय प्रावधान आवश्यक होंगे। ऐसे नियम बनाने का अधिकार केवल भारतीय रिजर्व बैंक के पास है। इसलिए प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी, वित्तीय और नियामकीय पहलुओं का व्यापक परीक्षण किया जाएगा, ताकि योजना भविष्य में किसी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई का सामना न करे।
परिवारों को मिल सकता है दीर्घकालिक आर्थिक सहारा
यदि यह योजना लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को मिल सकता है जो बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पहले से वित्तीय तैयारी करना चाहते हैं। वर्तमान समय में विद्यालयी शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, तकनीकी शिक्षा और उच्च अध्ययन की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अधिक ब्याज वाली बचत योजना लंबे समय में पर्याप्त शिक्षा कोष तैयार करने में सहायक हो सकती है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मासिक बचत और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलकर भविष्य में शिक्षा संबंधी बड़े खर्चों का बोझ काफी हद तक कम कर सकते हैं।
अभी केवल प्रारंभिक चरण में है प्रस्ताव, आधिकारिक घोषणा का इंतजार
भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक इस प्रकार की किसी विशेष शिक्षा बचत योजना की औपचारिक घोषणा नहीं की है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचार-विमर्श और बैंकिंग उद्योग से सुझाव प्राप्त करने के चरण में है। केंद्रीय बैंक सभी पक्षों की राय, संभावित वित्तीय प्रभाव और नियामकीय आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही आगे का निर्णय लेगा। इसलिए वर्तमान समय में इसे अंतिम योजना नहीं माना जा सकता। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय लिया जाता है तो उसकी विस्तृत रूपरेखा, पात्रता, ब्याज दर और अन्य शर्तों की घोषणा अलग से की जाएगी।
वित्तीय योजना बनाने का सही समय, विशेषज्ञों ने दी समय रहते बचत शुरू करने की सलाह
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि चाहे यह नई योजना लागू हो या नहीं, बच्चों की शिक्षा के लिए समय रहते बचत शुरू करना हमेशा लाभकारी होता है। लंबी अवधि तक नियमित निवेश करने से परिवारों पर भविष्य का आर्थिक दबाव कम पड़ता है और महंगी शिक्षा के लिए पर्याप्त धन जुटाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बचत के साथ-साथ निवेश के अन्य सुरक्षित विकल्पों का भी संतुलित उपयोग किया जाए। यदि भविष्य में भारतीय रिजर्व बैंक की यह विशेष योजना लागू होती है तो यह शिक्षा आधारित वित्तीय योजना बनाने वाले परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।