नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार देश में मानसून फिलहाल कुछ क्षेत्रों में कमजोर पड़ा है, हालांकि यह स्थिति अधिक समय तक नहीं रहने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 20 जुलाई 2026 से मानसून एक बार फिर सक्रिय होकर व्यापक क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियों को तेज करेगा। फिलहाल मौसम का स्वरूप क्षेत्रवार अलग-अलग बना हुआ है, जिससे कहीं भारी बारिश हो रही है तो कहीं लोग उमस और तेज गर्मी से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी कुछ दिनों तक मौसम अत्यंत संवेदनशील रहेगा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वर्षा की तीव्रता में अंतर देखने को मिल सकता है।
पूर्वी, मध्य और पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा का खतरा, कई क्षेत्रों के लिए अलर्ट
उपग्रह चित्रों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि पूर्वी, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के ऊपर घने वर्षा वाले बादलों का व्यापक विस्तार बना हुआ है। इसी के आधार पर भारतीय मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्च स्तर का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए जलभराव, भूस्खलन तथा नदियों के जलस्तर में वृद्धि जैसी संभावित परिस्थितियों के प्रति सावधानी बरतने का आग्रह किया है। विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कई दिन बरसेंगे बादल
मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में अगले चार से पांच दिनों तक व्यापक और तेज वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। इन क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी व्यक्त की गई है। वहीं जम्मू-कश्मीर, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में गरज-चमक के साथ मध्यम से तेज वर्षा का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन राज्यों में वर्षा की तीव्रता समय-समय पर बढ़ सकती है, इसलिए नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।
दिल्ली-एनसीआर में उमस ने बढ़ाई परेशानी, 20 जुलाई तक राहत के आसार कम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार कई दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण उमस और गर्मी का असर बढ़ गया है। हवा में नमी अधिक होने से तापमान अपेक्षाकृत अधिक महसूस हो रहा है और लोगों को दिन के साथ-साथ रात में भी राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई तक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक वर्षा की संभावना नहीं है। इस दौरान आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन उनसे वर्षा की उम्मीद कम है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 20 जुलाई के बाद मानसून की सक्रियता बढ़ने पर दिल्ली-एनसीआर में भी वर्षा का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिलने की संभावना बनेगी।
चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ का दिख रहा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान मौसम की स्थिति के पीछे पूर्वोत्तर भारत के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण तथा पश्चिमी विक्षोभ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में व्यापक वर्षा हो रही है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत शुष्क हवाएं प्रभावी बनी हुई हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी के कारण तापमान बढ़ा हुआ है और उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग का मानना है कि जैसे ही मानसूनी तंत्र दोबारा मजबूत होगा, इन क्षेत्रों में भी मौसम तेजी से बदल सकता है।
अगले सप्ताह से मिल सकती है राहत, मौसम विभाग ने सतर्क रहने की दी सलाह
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में मानसून की गतिविधियों में तेजी आने के साथ देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का दायरा बढ़ने की संभावना है। जहां भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा, वहीं गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में वर्षा राहत लेकर आ सकती है। विशेषज्ञों ने नागरिकों से मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देने, अनावश्यक जोखिम से बचने तथा यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी अवश्य लेने की सलाह दी है। बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन भी विभिन्न राज्यों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।