मध्य प्रदेश के हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ग्वालियर हाईकोर्ट से अहम फैसला आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को केवल "स्थायी कर्मचारी" (Classified Permanent Employee) घोषित कर देने से वह नियमित (Regular) कर्मचारी नहीं माना जाएगा। इसलिए उसे नियमित कर्मचारियों की तरह वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment), उच्च ग्रेड पे और अन्य सेवा लाभ देने का अधिकार स्वतः नहीं बनता। ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दैनिक वेतनभोगियों की इंक्रीमेंट और नियमित कर्मचारियों के समान वेतन-भत्ते की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब तक सेवाएं नियमों के अनुसार विधिवत नियमित (Regularize) नहीं होतीं, तब तक नियमित कर्मचारियों वाले लाभ नहीं दिए जा सकते।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
ग्वालियर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को "स्थायी कर्मचारी" घोषित करना और उसकी सेवाओं का "नियमितीकरण" (Regularization) दोनों अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। अदालत के अनुसार-
केवल वर्गीकृत स्थायी कर्मचारी बनने से नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता।
ऐसे कर्मचारियों को संबंधित पद का न्यूनतम वेतनमान दिया जा सकता है।
लेकिन नियमित कर्मचारियों की तरह इंक्रीमेंट, उच्च ग्रेड पे, पदोन्नति या अन्य सेवा लाभ नहीं मिलेंगे।
नियमित कर्मचारियों वाले लाभ कब मिलेंगे?
हाईकोर्ट ने साफ किया कि-
जब तक कर्मचारी की सेवाएं नियमों के तहत विधिवत नियमित नहीं होतीं,
तब तक वह नियमित कर्मचारी नहीं माना जाएगा।
इसलिए वार्षिक वेतन वृद्धि, उच्च ग्रेड पे और अन्य वित्तीय लाभ का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यानी केवल स्थायी वर्गीकरण से सभी सरकारी सेवा लाभ स्वतः लागू नहीं होंगे।
किस कर्मचारी ने दायर की थी याचिका?
यह मामला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के पंप ड्राइवर सुल्तान सिंह नरवरिया की याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि-
1800 रुपये के स्थान पर 1900 रुपये ग्रेड पे दिया जाए।
नियमित कर्मचारियों के समान वेतनमान मिले।
बकाया वित्तीय लाभ भी प्रदान किए जाएं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि समान परिस्थितियों वाले कुछ अन्य कर्मचारियों को पहले ऐसे लाभ मिल चुके हैं।
कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
अदालत ने कहा कि-
समान परिस्थितियों में किसी अन्य कर्मचारी को लाभ मिलने मात्र से सभी कर्मचारियों को वही लाभ देने का अधिकार स्वतः नहीं बन जाता।
सेवा लाभ संबंधित नियमों और नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं।
इसलिए याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस फैसले का क्या असर पड़ेगा?
इस निर्णय का असर मध्य प्रदेश के उन हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो लंबे समय से नियमित कर्मचारियों के समान वेतन, इंक्रीमेंट और अन्य सेवा लाभ की मांग कर रहे हैं। यदि उनकी सेवाएं अभी तक विधिवत नियमित नहीं हुई हैं, तो इस फैसले के बाद ऐसे दावों पर कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
निष्कर्ष
ग्वालियर हाईकोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का स्थायी वर्गीकरण और नियमित नियुक्ति दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। जब तक सेवाएं नियमों के अनुसार नियमित नहीं की जातीं, तब तक नियमित कर्मचारियों की तरह इंक्रीमेंट, ग्रेड पे और अन्य सेवा लाभ का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह फैसला भविष्य में दैनिक वेतनभोगियों से जुड़े समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार बन सकता है।