मुम्बई. भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने होने वाली अपनी केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक में सरकार को दिए जाने वाले लाभांश पर अंतिम फैसला ले सकता है। सूत्रों के अनुसार इस बार लाभांश राशि पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश दिया था, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में दिए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक था। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी हस्तांतरण इससे भी ज्यादा हो सकता है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापारिक दबावों के बीच यह अतिरिक्त लाभांश सरकार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। सरकार इस राशि का उपयोग आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, सब्सिडी प्रबंधन और विकास योजनाओं को गति देने में कर सकती है। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बना हुआ है।
आर्थिक पूंजी ढांचे के आधार पर तय होगी राशि
आरबीआई द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अधिशेष संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे यानी ईसीएफ के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत आकस्मिक जोखिम बफर को आरबीआई के बही-खाते के 4.50 प्रतिशत से 7.50 प्रतिशत के बीच बनाए रखना अनिवार्य होता है। इसके बाद बची हुई राशि सरकार को हस्तांतरित की जाती है। सूत्रों का कहना है कि मजबूत आय और वित्तीय स्थिरता के कारण इस बार अधिशेष राशि काफी बड़ी हो सकती है।
3.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है अधिशेष
बजट दस्तावेजों के अनुसार केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये तक लाभांश और अधिशेष मिलने की उम्मीद है। यह चालू वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है। हालांकि जानकारों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा बजट अनुमान से भी ऊपर जा सकता है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने हाल के वर्षों में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी रचा इतिहास
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, मजबूत ऋण विस्तार और बढ़ती आय के चलते इन बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं कुल शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। लगातार चौथे वर्ष सरकारी बैंकों ने सामूहिक रूप से मजबूत लाभ दर्ज किया है।
गैर-कर राजस्व में अहम भूमिका निभाएगा लाभांश
सरकार के लिए आरबीआई और अन्य संस्थानों से मिलने वाला लाभांश गैर-कर राजस्व का बड़ा स्रोत माना जाता है। वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार को कुल 6.66 लाख करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व के रूप में मिलने का अनुमान है। वहीं कर राजस्व 28.66 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरबीआई से अपेक्षा से अधिक लाभांश मिलता है तो इससे सरकार को वित्तीय घाटा नियंत्रित रखने और पूंजीगत खर्च बढ़ाने में अतिरिक्त मदद मिल सकती है।