राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मध्य प्रदेश में अपनी संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए पूरे राज्य को अब एक ही प्रांत के रूप में संगठित करने का फैसला लिया है। पहले प्रदेश तीन प्रांतों-मध्य भारत, मालवा और महाकौशल में बंटा हुआ था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इस विभाजन को खत्म कर दिया जाएगा। यह बदलाव संगठन को अधिक केंद्रीकृत और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
संभाग स्तर पर नई व्यवस्था लागू
नई संरचना के तहत संघ की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए संभाग स्तर पर नई इकाइयों का गठन किया जाएगा। विभागीय व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी, लेकिन उसके ऊपर संभाग की एक मजबूत परत जोड़ी जाएगी। इसी आधार पर पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां तय होंगी, जिससे संगठन में बेहतर समन्वय और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी।
सात संभागों में होगा पुनर्गठन
नई व्यवस्था के अनुसार मध्य प्रदेश को सात संभागों में बांटा गया है,भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा। इन सभी संभागों में संभाग प्रचारकों की नियुक्ति की जाएगी, जो अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन के विस्तार और गतिविधियों को संभालेंगे।
प्रदेश कार्यसमिति और नेतृत्व संरचना
राज्य स्तर पर एक नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन किया जाएगा, जिसका नेतृत्व राज्य प्रचारक करेंगे। यह कार्यसमिति संगठन की नीतियों को लागू करने, गतिविधियों की निगरानी करने और विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेगी। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और तेज होने की उम्मीद है।
संगठन विस्तार और बढ़ती सक्रियता
मध्य भारत क्षेत्र के प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने बताया कि संघ लगातार अपने विस्तार पर काम कर रहा है। मध्यभारत प्रांत में वर्तमान में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इसके अलावा विभिन्न हिंदू सम्मेलनों में 52 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई है। संघ के करीब 80 हजार स्वयंसेवकों ने 27 लाख से ज्यादा परिवारों तक संपर्क स्थापित किया है, जो संगठन की जमीनी पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं, जो 2026 में बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाएं हो गई हैं। यानी एक साल के भीतर 3943 नए स्थान जुड़े और 5820 नई शाखाएं शुरू हुईं, जो संगठन के तेजी से विस्तार को दिखाता है।
सामाजिक समरसता और “पंच परिवर्तन” पर जोर
संघ ने अपने सामाजिक अभियानों के तहत “पंच परिवर्तन” का आह्वान किया है, जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व की पहचान और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संगठन विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बढ़ाकर सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
विभिन्न समुदायों तक पहुंच बढ़ाने की पहल
संघ का कहना है कि उसका कार्य केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में विभिन्न समुदायों के परिवारों से संपर्क कर सामाजिक संवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास और समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
मार्च 2027 से लागू होगी नई संरचना
नई संगठनात्मक व्यवस्था 27 मार्च से लागू की जाएगी। इसके तहत पारंपरिक प्रांत व्यवस्था समाप्त कर संभाग आधारित डिवीजन सिस्टम लागू किया जाएगा। यह बदलाव संघ के कामकाज को अधिक प्रभावी, संगठित और व्यापक बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
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