मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 96.18 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई और यह 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। इसका असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
BSE Sensex सोमवार को करीब 550 अंक टूटकर 74,700 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं NIFTY 50 भी 200 अंक फिसलकर 23,450 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में सरकारी बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।
रुपया पहली बार 96.18 पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में 20 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार शुरू होते ही रुपया 96.18 पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव ने मुद्रा बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
कच्चे तेल की कीमत में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 2% चढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।
बाजार के सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,250 और 23,000 अहम सपोर्ट स्तर हैं। अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार में और गिरावट आ सकती है। वहीं 24,000 और 24,250 के स्तर पर रेजिस्टेंस माना जा रहा है। सेंसेक्स के लिए 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट है। वहीं 75,600 से 76,000 के बीच रेजिस्टेंस देखा जा रहा है। बाजार फिलहाल वैश्विक संकेतों के आधार पर उतार-चढ़ाव में बना रह सकता है।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने और उतार-चढ़ाव के बीच स्टॉप लॉस रणनीति अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ रहा है।