बोलपुर/शांतिनिकेतन: विश्वभारती और रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि शांतिनिकेतन के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक 'सोनाझुरी खोवाई हाट' के पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सोनाझुरी के जंगलों में पर्यटकों और व्यापारियों की गाड़ियों की अनियंत्रित एंट्री और अवैध पार्किंग के कारण हो रहे नुकसान को देखते हुए सोमवार को वन विभाग के कर्मियों ने मिट्टी काटने वाली मशीन (जेसीबी) की मदद से जंगल की सीमा पर एक गहरा गड्ढा (खाल) खोदकर मुख्य रास्ता हमेशा के लिए बंद कर दिया।
क्यों लिया गया इतना कड़ा फैसला?
वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खोवाई हाट के कुछ स्थानीय और बाहरी व्यापारी अधिक मुनाफे के लालच में अपने चार पहिया वाहनों (छोटे हाथी या मैटाडोर) में भारी मात्रा में सामान लादकर सीधे हाट के मुख्य बाजार और जंगल के भीतर तक ले जा रहे थे।
यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। व्यापारी और पर्यटक अपनी गाड़ियां सीधे जंगल के भीतर पेड़ों के बीच खड़ी (पार्क) कर देते थे। भारी वाहनों के पहियों के नीचे कुचलने के कारण जंगल के सैकड़ों छोटे-छोटे औषधीय और नए चारा पौधे (Saplings) नष्ट हो रहे थे। इसके अलावा, भारी गाड़ियों के लगातार आने-जाने से वहां की मिट्टी इतनी सख्त हो रही थी कि नए पौधों का उगना भी पूरी तरह से बंद हो गया था। इसका सीधा नकारात्मक असर सोनाझुरी जंगल के पर्यावरण और वहां की जैव विविधता (Biodiversity) पर पड़ रहा था।
जंगल के भीतर गाड़ियों की एंट्री पर पूरी तरह बैन
सोनाझुरी के बिगड़ते पर्यावरण को नियंत्रित करने और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए वन विभाग ने अब इस पूरे इलाके को 'नो व्हीकल जोन' घोषित कर दिया है। अब कोई भी चार पहिया वाहन हाट के मुख्य बाजार क्षेत्र या जंगल के भीतर प्रवेश नहीं कर सकेगा।वन अधिकारियों का कहना है कि शांतिनिकेतन के इस हिस्से में सालभर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का तांता लगा रहता है। ऐसे में सोनाझुरी खोवाई की प्राकृतिक सुंदरता, मिट्टी के कटाव (खोवाई) और पर्यावरण के संतुलन को बचाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, सोमवार को वन विभाग की टीम ने जंगल के भीतर लगे विभिन्न होटलों और रिसॉर्ट्स के अवैध विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग्स को भी उखाड़ फेंका।प्रशासन के इस कड़े कदम से हालांकि कुछ व्यापारियों को सामान लाने-ले जाने में असुविधा जरूर होगी, लेकिन प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने वन विभाग के इस फैसले का स्वागत किया है ताकि शांतिनिकेतन की इस अनमोल धरोहर को बचाया जा सके।