उच्चतम न्यायालय बुधवार को पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस सुनवाई में ममता बनर्जी खुद अपना पक्ष रख सकती हैं।सूत्रों के अनुसार, कानून की डिग्री (LLB) रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बात रख सकती हैं। बार एंड बेंच के अनुसार, ममता बनर्जी ने जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय, कलकत्ता से कानून की पढ़ाई पूरी की है और उनके वकील के रूप में अंतिम रिपोर्ट 2003 की है।
ममता बनर्जी बन सकती हैं पहली मुख्यमंत्री
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब SIR को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होंगी, तो अनुमति मिलने पर वह स्वयं अपना मामला पेश करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन सकती हैं। ममता बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी 2026 को दायर की थी।
अहम है आज की सुनवाई
आज की सुनवाई बंगाल की भविष्य की राजनीति और आगामी चुनावों की निष्पक्षता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ममता बनर्जी SIR मामले में दायर अन्य याचिकाओं पर बुधवार को होने वाली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय में मौजूद रह सकती हैं।
उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ, मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
इस मामले में ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था। इससे पहले उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य में चुनाव से पहले जारी मनमाने और खामियों से भरे SIR को रोकने का आग्रह किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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